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‘PoK समेत पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का…’, ब्रिटिश सांसद बॉब ब्लैकमैन का दो टूक बयान

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नई दिल्ली: ब्रिटेन के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत के पक्ष में खुलकर बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) समेत पूरे जम्मू और कश्मीर को भारत के साथ फिर से मिल जाना चाहिए। ब्लैकमैन लंबे समय से इस मुद्दे पर भारत का समर्थन करते आ रहे हैं।

जयपुर के कॉन्स्टिट्यूशनल क्लब में आयोजित एक हाई-टी कार्यक्रम में बोलते हुए बॉब ब्लैकमैन ने कहा कि उनका यह रुख नया नहीं है और न ही यह सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि वह पिछले 30 साल से भी ज्यादा समय से इस मुद्दे पर अपनी बात रखते आ रहे हैं।

1992 से अनुच्छेद 370 हटाने के समर्थक

ब्लैकमैन ने कहा, “मैंने अनुच्छेद 370 को हटाने की मांग तब नहीं की जब प्रधानमंत्री मोदी ने इसे लागू किया, बल्कि मैंने यह बात 1992 में ही कही थी।” उन्होंने बताया कि कश्मीर घाटी से कश्मीरी पंडितों के पलायन के बाद उनका नजरिया और भी मजबूत हो गया था। उस समय बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को सिर्फ उनके धर्म की वजह से अपने घर छोड़ने पड़े थे। उन्होंने कहा कि उस दौर में ब्रिटेन में विस्थापित समुदाय के साथ हुए अन्याय को उजागर करने के लिए उन्होंने कई प्रयास किए थे। ब्लैकमैन के अनुसार, “यह पूरी तरह गलत और अन्यायपूर्ण था कि लोगों को उनके ही पैतृक घरों से जबरन बाहर निकाला गया।”

 

आतंकवाद और PoK पर पाकिस्तान की भूमिका की आलोचना

ब्रिटिश सांसद ने कहा कि वह हमेशा कश्मीर में आतंकवाद की कड़ी निंदा करते रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने जम्मू और कश्मीर के कुछ हिस्सों पर पाकिस्तान के कब्जे को अवैध बताया। ब्लैकमैन ने कहा, “मैंने न सिर्फ आतंकवाद की निंदा की है, बल्कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे का भी विरोध किया है। मेरी शुरुआत से यही राय रही है कि पूरा जम्मू और कश्मीर भारत के शासन में होना चाहिए।”

भारत के साथ खड़े होने की अपील

ब्लैकमैन ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले की भी कड़ी निंदा की थी, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा था कि वह इस हमले से बेहद दुखी हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल हालात शांत हैं, लेकिन स्थिति अब भी संवेदनशील बनी हुई है। उन्होंने ब्रिटेन की सरकार से अपील की कि आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ मजबूती से खड़ा हुआ जाए। उनके मुताबिक, भारत पश्चिमी देशों के साथ सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करना चाहता है और ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समर्थन बेहद जरूरी है।

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