इंटरनेशनल डेस्क: कोलंबिया के पूर्व राष्ट्रपति अल्वारो उरीबे को अदालत ने रिश्वत देने और गवाहों को प्रभावित करने के आरोप में 12 साल की कड़ी सजा सुनाई है। यह सजा उनके खिलाफ चल रहे एक आपराधिक मामले में दी गई है, जिसमें उन पर 1990 के दशक में अर्धसैनिक समूहों से संबंध रखने के आरोपों पर गवाहों को प्रभावित करने का आरोप था।
सजा सुनाए जाने के बाद अल्वारो उरीबे ने कहा कि वह इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे। उनके वकील ने यह भी अनुरोध किया था कि सजा के खिलाफ अपील तक उन्हें रिहा किया जाए, लेकिन न्यायाधीश सैंड्रा हेरेडिया ने यह कहते हुए इस अनुरोध को खारिज कर दिया कि उरीबे देश छोड़कर भाग सकते हैं।
अदालत का फैसला और आरोप
अदालत ने यह फैसला लगभग छह महीने तक चली सुनवाई के बाद सुनाया। अभियोजन पक्ष ने यह साबित किया कि उरीबे ने गवाहों को प्रभावित करने के लिए रिश्वत दी थी, जिनके बयान 1990 के दशक में उनके अर्धसैनिक समूहों से संबंधों को लेकर थे। उरीबे ने इन आरोपों से इंकार करते हुए कहा कि यह मुकदमा राजनीति से प्रेरित है और उनका कोई गलत काम नहीं है।
सजा की शर्तें
सजा के तहत, उरीबे को 12 साल की नजरबंदी और आठ वर्षों तक किसी भी सार्वजनिक पद पर रहने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अलावा, अदालत ने उन्हें लगभग 776,000 अमेरिकी डॉलर का जुर्माना भी लगाया है।
पूर्व राष्ट्रपति का विवादास्पद कार्यकाल
अल्वारो उरीबे ने 2002 से 2010 तक कोलंबिया के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। वे अमेरिका के समर्थन से कोलंबिया की सत्ता में आए थे और उनके कार्यकाल को लेकर देश में मिश्रित प्रतिक्रिया रही है। कुछ लोग उन्हें कोलंबिया को विफल राष्ट्र बनने से बचाने का श्रेय देते हैं, जबकि अन्य उनके ऊपर मानवाधिकार उल्लंघन और अर्धसैनिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाते हैं।

