नेशनल डेस्क : उत्तर प्रदेश के संभल जिले के पंवासा ब्लॉक स्थित अतरासी गांव में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत एक बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। यहां पर दर्जनभर से अधिक मृत व्यक्तियों के नाम पर फर्जी जॉब कार्ड बनाकर मजदूरी निकाली गई। यह धोखाधड़ी गांव की मौजूदा ग्राम प्रधान सुनीता यादव द्वारा की गई है, जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान मृतक ग्रामीणों के नाम पर जॉब कार्ड बनवाए और कागजों पर काम पूरा होने का दावा करके पैसे निकालने का काम किया। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…
जांच और वसूली की प्रक्रिया
आपको बता दें कि संभल के जिला मजिस्ट्रेट राजेंद्र पेंसिया ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की और कहा कि यदि गबन 10 प्रतिशत से कम पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों से वसूली की जाएगी। इस मामले में 1.05 लाख रुपये का गबन पाया गया है और इसकी वसूली वर्तमान ग्राम प्रधान से की जा रही है। जिला प्रशासन ने यह भी पुष्टि की है कि अन्य विकास कार्यों की भी जांच की जा रही है, और इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ग्राम प्रधान पर लगे गंभीर आरोप
ग्राम प्रधान सुनीता यादव पर आरोप है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान मृतक व्यक्तियों के नाम पर जॉब कार्ड बनवाए और उनके नाम से कागजों पर काम पूरा कर दिखाया, जबकि वास्तव में उन व्यक्तियों ने मनरेगा के तहत कोई काम नहीं किया। इस तरह की धोखाधड़ी से सरकारी कोष से पैसे निकाले गए।
BSF के प्राचार्य भी बने शिकार
चौंकाने वाली बात यह है कि इस धोखाधड़ी में मुलायम सिंह यादव इंटर कॉलेज के प्राचार्य ऋषिपाल सिंह का भी नाम सामने आया है। प्राचार्य ने कहा, “मेरे नाम पर बिना मेरी जानकारी के जॉब कार्ड बना दिया गया और इसके आधार पर पैसे निकाले गए। मैंने कभी भी मनरेगा के तहत कोई काम नहीं किया, फिर भी मेरा नाम रिकॉर्ड में दर्ज था। मुझे इस मामले की जानकारी तब हुई जब अधिकारी जांच करने आए।”
गांववालों ने लगाए गंभीर आरोप
गांव के निवासी संजीव कुमार ने बताया कि उनके दादा जगत सिंह का 2020 में निधन हो गया था, और उनके नाम पर भी मनरेगा मजदूरी निकाली गई। उन्हें यह तब पता चला जब अधिकारी गांव में जांच करने आए। संजीव ने यह भी कहा कि करीब एक दर्जन मृत व्यक्तियों के नाम पर जॉब कार्ड बनाए गए थे।
निर्मल दास की शिकायत…
मुख्य शिकायतकर्ता निर्मल दास ने आरोप लगाया कि मौजूदा ग्राम प्रधान के दिवंगत ससुर और उनके परिवार के कई सदस्यों के नाम पर भी जॉब कार्ड बनाए गए थे, और सरकारी पैसे उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल कर निकाले गए। उन्होंने कहा कि कुछ लाभार्थी अब गांव में रहते ही नहीं हैं, फिर भी उनके नाम का इस्तेमाल करके पैसे निकाले गए।
मनरेगा योजना और उसकी प्रक्रिया
मनरेगा एक केंद्र सरकार की योजना है, जिसके तहत ग्रामीण नागरिकों को हर वर्ष 100 दिनों का रोजगार मुहैया कराया जाता है। इस योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी के पास एक जॉब कार्ड होना जरूरी है, जिसे बनवाने और काम करने की प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक रखना चाहिए। इस धोखाधड़ी ने मनरेगा योजना की विश्वसनीयता को प्रभावित किया है और यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि ऐसे मामलों पर कड़ी नजर रखी जाए।
अधिकारियों द्वारा कार्रवाई
संभल जिला प्रशासन ने इस घोटाले की जांच शुरू कर दी है और मामले में ग्राम प्रधान से वसूली की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इसके अलावा, अधिकारियों ने यह भी सुनिश्चित किया है कि ऐसी धोखाधड़ी से सरकार के खजाने में हो रही लूट को रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
यह मामला मनरेगा योजना के तहत हो रही एक गंभीर धोखाधड़ी को उजागर करता है, जिसमें मृत व्यक्तियों के नाम का गलत इस्तेमाल किया गया। यह मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा जांच और वसूली की प्रक्रिया शुरू की गई है। अब देखना यह होगा कि इस जांच में और कौन-कौन से तथ्यों का खुलासा होता है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

