नई दिल्ली: सरकार ने आमतौर पर दर्द और बुखार में इस्तेमाल की जाने वाली दवा निमेसुलाइड (Nimesulide) के निर्माण पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही, जिन निमेसुलाइड दवाओं में 100 मिलीग्राम से अधिक मात्रा होती है, उनकी खाने वाली (ओरल) दवाओं की बिक्री और वितरण भी पूरी तरह बंद कर दिया गया है। यह फैसला स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने लिया है। मंत्रालय ने इस संबंध में 29 दिसंबर 2025 को आधिकारिक अधिसूचना जारी की।
1940 की धारा 26A के तहत लगा प्रतिबंध
सरकार का कहना है कि 100 मिलीग्राम से ज्यादा डोज वाली निमेसुलाइड दवाओं का इस्तेमाल मानव स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। विशेषज्ञों की राय के अनुसार, इससे शरीर पर बुरा असर पड़ने का खतरा रहता है। सरकार ने यह प्रतिबंध औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 26A के तहत लगाया है। यह निर्णय ड्रग्स तकनीकी सलाहकार बोर्ड से सलाह लेने के बाद लिया गया।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि बाजार में निमेसुलाइड के सुरक्षित विकल्प पहले से मौजूद हैं, इसलिए इस दवा पर रोक लगाना जरूरी समझा गया। सरकार ने साफ किया है कि यह प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। अब देश में 100 मिलीग्राम से अधिक मात्रा वाली निमेसुलाइड की ओरल दवाओं का निर्माण, बिक्री और वितरण पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा।
यह कदम जनहित में उठाया गया
इससे पहले सरकार ने औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियम, 1945 में बदलाव का मसौदा जारी किया था और आम जनता से इस पर सुझाव और आपत्तियां मांगी थीं। तय समय के भीतर मिले सुझावों पर विचार करने के बाद सरकार ने यह अंतिम फैसला लिया। सरकार का कहना है कि यह कदम जनहित में उठाया गया है ताकि लोगों की सेहत को सुरक्षित रखा जा सके और दवाओं के गलत या खतरनाक इस्तेमाल से होने वाले नुकसान को रोका जा सके।

