शिमला: हिमाचल प्रदेश के नगर और ग्राम नियोजन तथा तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने शनिवार को घोषणा की कि राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में भी भवन निर्माण के सख्त मानदंड लागू करेगी। यह कदम जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती आवृत्ति से निपटने के लिए उठाया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि यह कदम राज्य की कैबिनेट बैठक में विचार के लिए रखा जाएगा। इस पहल का उद्देश्य सुरक्षित और व्यवस्थित निर्माण सुनिश्चित करना है, ताकि भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
पिछले तीन वर्षों में हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण व्यापक तबाही हुई है। इन आपदाओं से सीख लेते हुए, सरकार ने अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी भवन निर्माण के लिए मानक तय करने का निर्णय लिया है। मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि राज्य के आपदा-प्रवण क्षेत्रों में अब निर्माण गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग ने ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग के साथ मिलकर भवन निर्माण मानदंडों का मसौदा तैयार किया है, जिसे अगले कैबिनेट बैठक में चर्चा के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
धर्माणी ने यह भी कहा कि हालांकि सभी जगहों पर समान दिशा-निर्देश लागू करना मुश्किल है, लेकिन जलवायु परिवर्तन और हिमाचल जैसी पहाड़ी राज्य में आपदाओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए, यह कदम आवश्यक है। वह बोले, “हमें संवेदनशील क्षेत्रों में संरचनात्मक रूप से सुरक्षित घरों का निर्माण करना होगा, और उन क्षेत्रों में निर्माण कार्यों को प्रतिबंधित करना होगा जो बाढ़ या भूस्खलन से प्रभावित होते हैं।” मंत्री ने यह भी कहा कि उन क्षेत्रों में बस्तियों से बचने की आवश्यकता है जहां पिछले सालों में बाढ़ का मलबा जमा हुआ हो, और स्लाइडिंग ज़ोन में निर्माण पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाएगा। इसके अलावा, राज्य सरकार मौजूदा हरित क्षेत्रों की रक्षा करने और नए ऐसे क्षेत्रों की पहचान करने का प्रयास करेगी, जहां निर्माण पर प्रतिबंध लगाया जा सके।
राजेश धर्माणी ने कहा कि भवन निर्माण मानदंडों के पालन के लिए स्थानीय और विशेष विकास एजेंसियां मिलकर काम करेंगी। नगर एवं ग्राम नियोजन निदेशालय की शक्तियां अब स्थानीय अधिकारियों को सौंप दी गई हैं, ताकि जनता को नगर नियोजन कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़े। इसके अलावा, पंचायती राज संस्थाएं और शहरी स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों को भी प्रवर्तन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा, जिससे विकास का उचित नियमन सुनिश्चित हो सके।
धर्माणी ने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों में आपदाओं की आवृत्ति बढ़ रही है। इसलिए, विनियमित और नियोजित निर्माण से ही भविष्य में इन आपदाओं के प्रभाव को कम किया जा सकता है। उन्होंने इसे राज्य के संतुलित और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
एक अन्य नीतिगत पहल के तहत, मंत्री ने स्कूलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर शिक्षा विभाग द्वारा लगाए गए प्रतिबंध की पुष्टि की और इसका स्वागत किया। 18 सितंबर को जारी आदेश के अनुसार, छात्रों और शिक्षकों दोनों को स्कूल के समय में मोबाइल फोन का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी। मंत्री ने इसे एक प्रगतिशील निर्णय बताते हुए कहा कि इससे छात्रों का ध्यान पढ़ाई में केंद्रित रहेगा और शिक्षक शिक्षण कार्य में पूरी तरह से व्यस्त रहेंगे।
राजेश धर्माणी ने प्रधानमंत्री द्वारा हिमाचल प्रदेश के लिए घोषित ₹1,500 करोड़ की आपदा राहत राशि का स्वागत किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि धनराशि को शीघ्र जारी किया जाए ताकि राहत कार्य प्रभावित न हों। मंत्री ने कहा, “जब तक धनराशि समय पर जारी नहीं की जाती, तब तक राहत, पुनर्स्थापन और पुनर्वास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे, जैसे सड़कों, बिजली और जलापूर्ति योजनाओं की बहाली युद्धस्तर पर की जा रही है, हालांकि इसका पूर्ण सुधार होने में समय लगेगा।
मेष: दिन शुभ रहेगा...