हिमाचल प्रदेश डेस्क: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश पुलिस के पूर्व आईजी जहूर हैदर जैदी को बड़ी राहत दी है। अदालत ने उनकी उम्रकैद की सजा पर फिलहाल रोक लगा दी है। हाई कोर्ट ने जैदी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि जब तक उनकी अपील का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक उनकी सजा सस्पेंड रहेगी।
क्या है हिरासत में मौत का मामला?
गौरतलब है कि साल 2017 में शिमला के कोटखाई में हुए गुड़िया रेप और हत्या मामले में सूरज नाम के आरोपी की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। आरोप था कि हिरासत के दौरान पुलिस द्वारा की गई कथित बर्बरता के चलते उसकी जान चली गई। हालांकि, उस समय पुलिस ने इस मौत के लिए एक अन्य कैदी को जिम्मेदार ठहराया था। इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया था। गुस्साए लोगों ने थाने समेत कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया था।
चंडीगढ़ CBI अदालत का फैसला
यह मामला बाद में शिमला से ट्रांसफर होकर चंडीगढ़ की विशेष CBI अदालत में पहुंचा। जनवरी 2025 में CBI अदालत ने फैसला सुनाते हुए जहूर हैदर जैदी समेत 7 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को हिरासत में मौत के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद जैदी ने CBI अदालत के फैसले को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने उनकी सजा पर फिलहाल रोक लगा दी है।
इन आरोपियों को मिली थी सजा, एक अधिकारी बरी
CBI अदालत ने इस मामले में तत्कालीन डीएसपी मनोज जोशी, पुलिस सब-इंस्पेक्टर राजिंद्र सिंह, एसआई दीप चंद शर्मा, मुख्य आरक्षी मोहन लाल और सूरत सिंह, चीफ कॉन्स्टेबल रफी मोहम्मद और कांस्टेबल रनीत सटेटा को भी उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वहीं, सबूतों की कमी और गवाहों के बयान के आधार पर तत्कालीन एसपी डीडब्ल्यू नेगी को अदालत ने बरी कर दिया था।

