नेशनल डेस्क : यूपीएससी 2024 की परीक्षा में 533वीं रैंक हासिल करने वाली पूर्वा चौधरी इन दिनों चर्चा का केंद्र बन गई हैं। उन्होंने अपनी मेहनत और संघर्ष से न सिर्फ अपने परिवार बल्कि अपने इलाके का नाम भी रोशन किया है। उनकी सफलता और आकर्षक लुक को लेकर पहले ही सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही थी, लेकिन अब वह ओबीसी (Other Backward Class) सर्टिफिकेट को लेकर एक विवाद में फंसी हुई हैं। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…

OBC सर्टिफिकेट पर उठे सवाल
आपको बता दें कि पूर्वा चौधरी के ओबीसी-NCL (Non-Creamy Layer) सर्टिफिकेट को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद उठ खड़ा हुआ है। कुछ लोग आरोप लगा रहे हैं कि उनके परिवार की स्थिति ओबीसी सर्टिफिकेट के लिए अनुकूल नहीं है। उनका कहना है कि पूर्वा के पिता ओमप्रकाश सहारण एक वरिष्ठ RAS अफसर हैं, और ऐसे में उनकी बेटी को ओबीसी का लाभ उठाना सही नहीं है। सोशल मीडिया पर यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि पूर्वा का जीवन स्तर (लग्जरी लाइफस्टाइल) बहुत ऊंचा है महंगी कार, हैंडबैग और अन्य प्रॉपर्टी के आधार पर लोग उनकी आर्थिक स्थिति पर सवाल उठा रहे हैं। आरोपों के अनुसार, कुछ लोगों का मानना है कि ऊंची पहुंच और फर्जीवाड़ा की वजह से कुछ लोग गरीबों का हक छीन रहे हैं और समाज के कमजोर वर्गों का फायदा उठा रहे हैं।
कौन हैं पूर्वा चौधरी
पूर्वा चौधरी राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के बोलांवाली गांव की रहने वाली हैं। उन्होंने यूपीएससी 2024 में 533वीं रैंक हासिल की है। पूर्वा ने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट जेवियर्स स्कूल से की है और इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। उनके पिता ओमप्रकाश सहारण एक RAS अफसर हैं और वर्तमान में कोटपुतली में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के पद पर कार्यरत हैं।
OBC को 27% आरक्षण…
दरअसल, ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए UPSC की परीक्षा में 27% आरक्षण निर्धारित किया गया है। इसका मतलब है कि हर एक भर्ती प्रक्रिया में कुल 27% सीटें ओबीसी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित होती हैं, ताकि उन्हें समान अवसर मिल सकें। इस आरक्षण के अंतर्गत आने वाले उम्मीदवारों को सामान्य श्रेणी के मुकाबले कुछ विशेष लाभ मिलते हैं।
क्रीमी लेयर और नॉन-क्रीमी लेयर का अंतर
- क्रीमी लेयर: ओबीसी के वह उम्मीदवार जो संपन्न और उच्च वर्गीय परिवारों से आते हैं, उन्हें क्रीमी लेयर के तहत माना जाता है। क्रीमी लेयर में आने वाले उम्मीदवारों को UPSC परीक्षा में कोई आरक्षण या छूट नहीं मिलती। यह श्रेणी उच्च आय वाले ओबीसी परिवारों को शामिल करती है, जिनकी आय सीमा सरकार द्वारा निर्धारित की जाती है।
- नॉन-क्रीमी लेयर: ओबीसी उम्मीदवारों का वह हिस्सा जिनकी पारिवारिक आय सरकारी सीमा से कम है, उन्हें नॉन-क्रीमी लेयर कहा जाता है। इस श्रेणी के उम्मीदवारों को आरक्षण का लाभ मिलता है। यह वर्ग आरक्षण का पूरा फायदा उठा सकता है, और उन्हें सरकारी नौकरियों और शिक्षा में विशेष अवसर मिलते हैं।
उम्र में छूट
ओबीसी उम्मीदवारों को UPSC की परीक्षा में उम्र में 3 साल तक की छूट दी जाती है। इसका मतलब है कि सामान्य श्रेणी के मुकाबले ओबीसी उम्मीदवार अधिक उम्र में भी परीक्षा में बैठ सकते हैं। उदाहरण के लिए, सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार के लिए उम्र की सीमा 32 वर्ष है, तो ओबीसी उम्मीदवार के लिए यह सीमा 35 वर्ष हो जाती है।
PWD और एक्स सर्विसमैन के लिए अतिरिक्त छूट
यदि ओबीसी उम्मीदवार PWD (Persons with Disabilities) या Ex-Servicemen श्रेणियों के अंतर्गत आते हैं, तो उन्हें इन श्रेणियों के तहत भी अतिरिक्त उम्र छूट मिलती है। इससे उनके लिए परीक्षा में बैठने का अवसर और भी अधिक बढ़ जाता है।
अटेम्प्ट की संख्या
ओबीसी उम्मीदवारों को UPSC परीक्षा में 9 अटेम्प्ट दिए जाते हैं। इसका मतलब है कि ओबीसी उम्मीदवार 9 बार तक मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं, जबकि सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए यह संख्या 6 अटेम्प्ट तक होती है।