नेशनल डेस्क : मौजूदा समय में विश्व में कई देशों के बीच तनाव के हालात बने हुए हैं। रूस और यूक्रेन के बीच 3 साल से भीषण जंग चल रही है। ईरान और इजरायल के बीच चल रही जंग कुछ ही समय पहले थमी है। मौजूदा समय में छोटी-छोटी बातों पर देशों के आपसी संबंधों पर असर दिख रहा है। ईरान और इजरायल के बीच जंग हो रही थी, लेकिन अचानक अमेरिका की एंट्री ने हालात और भी चिंताजनक बना दिए।
कुछ समय पहले ही ईरान ने कतर में मौजूद अमेरिकी एयरबेस पर हमला किया। इसके चलते लगने लगा था कि अब कतर भी जंग में शामिल हो सकता है। फिलहाल 12 दिन चली लड़ाई के बाद सीजफायर लागू हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसको लेकर घोषणा की है। कोई देश दूसरे देश में जाकर अपना सैन्य अड्डा क्यों बनाता है, इसकी जरूरत क्यों पड़ती है? क्या भारत के पास भी दूसरे देशों में सैन्य बेस है? इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
बहुत जरूरी होते हैं विदेशी सैन्य अड्डे
बता दें कि हर बड़ा देश सिक्योरिटी के लिहाज से दूसरे देशों में अपने सैन्य अड्डे बनाते हैं। इन अड्डों में ही घातक हथियार रखे जाते हैं। दुश्मन से लड़ने और उस पर नजर रखने के लिए सैन्य अड्डों को जरूरी माना जाता है। इन सैन्य अड्डों में घातक सुरक्षा उपकरणों के अलावा जवानों की तैनाती भी की जाती है। इसके लिए जरूरी तौर पर सैनिकों को प्रशिक्षण दिए जाने के साथ ही सैन्य गतिविधियों का संचालन भी किया जाता है।
भारत भी लगातार पाकिस्तान और चीन से खतरे को देखते हुए अपनी तैयारियों को तेज कर रहा है। पूरी दुनिया में दबदबा कायम करने के लिए भारत अपने रक्षा तंत्र को मजबूत कर रहा है। भारत का पहला एयरबेस ताजिकिस्तान के दक्षिणी हिस्से के फारखोर में है। भूटान में भी सेना की ट्रेनिंग टीम मौजूद है। मॉरीशस सैन्य ठिकाने के जरिए भी भारत अपने समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था देखता है।
डुक्म में सैन्य ठिकाना
ओमान के रस अल हद्द में भी भारत ने अपना लिसनिंग पोस्ट बनाया है। डुक्म में भी सैन्य ठिकाना भारत ने बनाया है, जहां वायुसेना और नौसेना के जहाजों की मरम्मत और आपूर्ति का काम होता है। भारत ने अपना एक सुरक्षा बेस सिंगापुर के चांगी में बनाया है, जहां से मलक्का जलडमरूमध्य जैसे समुद्री मार्गों की सुरक्षा निगरानी की जाती है।

