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रडार की पकड़ से बाहर, ब्रह्मोस मिसाइलों और घातक तोपों से लैस; जानें कितना घातक है INS Tamal?

ins tamal

नेशनल डेस्क : भारतीय नौसेना की ताकत में और भी इजाफा हुआ है। इंडियन नेवी को 1 जुलाई से नया युद्धपोत आईएनएस तमाल (INS Tamal) मिला है। इस पोत पर ब्रह्मोस मिसाइल लैस है, जो 450 किलोमीटर तक हमला करने में सक्षम है। इस पोत के शामिल होने के बाद नौसेना में 14 फ्रिगेट हो चुके हैं। इस युद्धपोत पर 33 फीसदी उपकरण स्वदेशी हैं, जिसे भारत और रूस ने मिलकर तैयार किया है।

इस पोत को रूस के कालिनिनग्राद में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया है। यह पोत काफी आधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट से बनाया गया है, जो रडार की पकड़ से बाहर है। इस 250 से ज्यादा भारतीय नौसैनिक रूस से लेकर आए हैं। इस पोत की टेस्टिंग 3 महीने पहले ही शुरू हो गई थी। आइए इस खतरनाक युद्धपोत के बारे में जान लेते हैं। बता दें कि इस पोत को रूस के यंतर शिपयार्ड में तैयार किया गया है।

450 किलोमीटर तक है रेंज

ब्रह्मोस मिसाइल के अलावा इस पोत पर पानी के नीचे टारगेट ध्वस्त करने वाले टॉरपीडो को लैस किया गया है। इसका गन सिस्टम हर मिनट 5 हजार गोलियां बरसा सकता है। इसके अंदर एंटी शिप मिसाइलों और ड्रोन्स को गिराने की क्षमता भी है। इस युद्धपोत की रेंज 450 किलोमीटर तक है।

पोत पर 100MM वाली A-190-01 तोप भी लगी है। इस तोप की मारक क्षमता एक मिनट में 80 राउंड तक है। इसका निशाना भी अचूक माना जाता है। साथ में तोप के साथ SHTIL वर्टिकल लॉन्च एयर सिस्टम भी इंस्टॉल किया गया है। बताया जा रहा है कि फिलहाल इस पोत को वेस्टर्न नेवल कमांड में तैनात किया जाएगा। इस कमांड का काम पश्चिमी हिंद महासागर और अरब सागर में कड़ी निगरानी करना है।

समुद्री सुरक्षा होगी मजबूत

माना जा रहा है कि आईएनएस तमाल की तैनाती से भारत की समुद्री सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी। अरब सागर और पाकिस्तान की कराची बंदरगाह पर नजर रखना भारत के लिए आसान रहेगा। यही नहीं, इस युद्धपोत को तस्करी रोकने के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा। किसी समुद्री आपदा में भी इस पोत की भूमिका अहम रहेगी।

21 हजार करोड़ में हुआ था समझौता

भारत ने अक्टूबर 2016 में रूस के साथ 21 हजार करोड़ के दो समझौते किए थे। इनके अनुसार रूस को दो फ्रिगेट बनाकर देने थे। दिसंबर 2024 में आईएनएस तुषिल भारतीय नौसेना को मिल चुका है। अब आईएनएस तमाल मिल गया है। बता दें कि इस समय 2 पोत गोवा शिपयार्ड में बन रहे हैं। 2026 तक इनको भी नेवी में शामिल कर लिया जाएगा।

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