इंटरनेशनल डेस्क : ईरान और इजरायल के बीच लगातार भीषण लड़ाई चल रही है। इसके चलते लगातार पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति बढ़ती जा रही है। 13 जून को बिना किसी चेतावनी के ईरान के कई शहरों पर इजरायल ने धावा बोल दिया था। हमले में इजरायल ने दावा किया था कि उसने ईरान के कई बड़े सैन्य कमांडर और प्रमुख परमाणु वैज्ञानिक मारे गिराए हैं। एक ही रात में ईरान की आर्मी के चीफ, IRGC कमांडर और प्रमुख वैज्ञानिकों को मार डालने के दावों के बाद इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद फिर से चर्चाओं में आ गई थी। माना जाता है कि मोसाद ने ही हमले की पूरी प्लानिंग की थी।
माना जाता है कि मोसाद ने अब तक जितने भी ऑपरेशन लॉन्च किए हैं, वे सभी सफल रहे हैं। इसी वजह से उसे दुनिया की सबसे सफल खुफिया एजेंसी माना जाता है। हैरानी की बात है कि यह एजेंसी भी एक असफल ऑपरेशन चला चुकी है। ये ऑपरेशन इराक के तत्कालीन तानाशाह सद्दाम हुसैन को मारने के लिए चलाया गया था, जो मोसाद के लिए आत्मघाती साबित हुआ।
En 1992, Israël a préparée l’«Operation Bramble Bush», un plan pour assassiner le président Saddam Hussein avec un missile. Alors qu’ils s’entraînaient à la future mission, 5 membres du commando israélien sont morts. La mission a été annulée et considérée comme un échec total. pic.twitter.com/YHOvqmSP5v
— Bouteflikov™ (@Bouteflikov) October 7, 2020
अमेरिका और इजरायल का था प्लान
बात 1990 की है, जब मोसाद ने पूर्व इराकी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को मारने के लिए ऑपरेशन ब्रम्बल बश लॉन्च किया था। 1991 में खाड़ी युद्ध हुआ था, जिसके बाद अमेरिका और इजरायल सद्दाम को बड़ा दुश्मन मानने लगे थे। इसके चलते मोसाद ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में सद्दाम को मारने का प्लान बनाया था।
ऐसे करना था अटैक
इस ऑपरेशन के तहत ऑपरेशन पूरा करने का जिम्मा इजरायल की सबसे घातक कमांडो यूनिट सायेरेट मटकल को सौंपा गया था। एजेंसी को पता था कि सद्दाम अपने गृह नगर तिकरित में एक अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होंगे। ऐसे में इजरायली कमांडो में उनको अरबी ड्रेस में जाकर कंधे से दागी जाने वाली मिसाइलों से मार गिराने का प्लान बनाया था। इस ऑपरेशन के लिए IDF की ओर से भी मंजूरी दी गई थी।
ऐसे चकनाचूर हुआ प्लान
हमले से पहले इजरायली घातक टुकड़ी ने 5 नवंबर 1992 को नेगेव रेगिस्तान में प्रैक्टिस की थी। हमले को सटीक तौर पर अंजाम देने के लिए असली मिसाइलों का प्रयोग किया गया था, लेकिन अभ्यास के दौरान एक कमांडो ने अपनी ही टीम पर गलती से मिसाइल दाग दी थी। यह गलती भारी पड़ी और इजरायल की घातक टुकड़ी के 5 कमांडो मारे गए थे। हमले के दौरान 6 गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिसके बाद इस ऑपरेशन को रद्द करने का फैसला लिया गया था। बताया जा रहा है कि कई साल तक अपने नागरिकों से भी इजरायल ने इसके संदर्भ में छिपाकर रखा था।

