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निमिषा प्रिया मामले में SC में टली सुनवाई, जानें क्या है यमन का ‘किसास’ कानून; क्या बचेगी भारतीय नर्स की जान?

Nimisha Priya

नेशनल डेस्क: केरल की नर्स निमिषा प्रिया के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई है। भारतीय नर्स को यमन में कुछ राहत मिली है, उसकी फांसी थोड़े समय के लिए टल चुकी है। निमिषा को फांसी देने के लिए 16 जुलाई की तिथि मुकर्रर थी, लेकिन उसे टाल दिया गया। तलाल महदी का भाई साफ कर चुका है कि वे निमिषा को माफ नहीं करेंगे। उसको किसास यानी अल्लाह कानून का सामना करना पड़ेगा। इस कानून के बारे में विस्तार से जानते हैं।

निमिषा की फांसी की नई तारीख तय नहीं हो सकी है। 38 साल की नर्स के मामले में महदी का भाई कह चुका है कि उनको ब्लड मनी में दिलचस्पी नहीं है। दोषी महिला को फांसी होनी चाहिए। महदी का परिवार जिस किसास कानून की बात कर रहा है, उसके बारे में जानते हैं। इस्लामिक देशों में इस कानून का सिद्धांत कुरान से लिया गया है। इस शब्द का प्रयोग समानता के लिए होता है।

आंख के बदले आंख की अवधारणा

बाइबल में आंख के बदले आंख की अवधारणा है। यानी किसी भी पीड़ित को न्याय का अधिकार है। यानी किसी के भाई का मर्डर हुआ है तो कातिल को मौत की सजा का हक होता है। किसास में उन अपराधों के बदले में कार्रवाई होती है, जो जानबूझकर किए जाते हैं। निमिषा के मामले में भी ऐसा कुछ है। परिवार के अनुसार तलाल का मर्डर निमिषा ने प्री प्लांड ढंग से किया था। यही नहीं, हत्या के बाद उसकी बॉडी को भी सुनियोजित ढंग से ठिकाने लगाया। ऐसे में उसे माफी का हक नहीं है।

2 तरह का होता है किसास कानून

बता दें कि किसास कानून 2 तरह का होता है। एक होता है जिंदगी के बदले जिंदगी। दूसरा दोषी शख्स के शरीर के अंग पीड़ित के परिवार को इंसाफ देने के लिए काट दिए जाते हैं। प्रिया की फांसी की सजा टली है, इससे लग रहा है कि कूटनीतिक स्तर पर कोई हल निकल सकता है। महदी के परिवार ने सजा न टालने की गुहार लगाई थी, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। ऐसे में देश को कुछ उम्मीद है।

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