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मान नहीं रहा मृतक का परिवार, क्या बच जाएगी निमिषा प्रिया की जिंदगी; जानें क्या चाहता है महदी का भाई?

July 17, 2025

मान नहीं रहा मृतक का परिवार, क्या बच जाएगी निमिषा प्रिया की जिंदगी; जानें क्या चाहता है महदी का भाई?

इंटरनेशनल डेस्क: केरल की जो नर्स निमिषा प्रिया यमन में मौत की सजा का सामना कर रही है, उसके मामले में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। निमिषा को 16 जुलाई को फांसी होनी थी, लेकिन ऐन मौके पर किसी तरह मध्यस्थता के चलते सजा को टाल दिया गया। मामले में मृतक तलाल अब्दो महदी के भाई का बयान सामने आया है। बयान के बाद माना जा रहा है कि निमिषा के बचने की उम्मीदें कम ही हैं।

आखिरी समय में सजा टलने के बाद महदी के भाई अब्देल फत्तह महदी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अब्देल का कहना है कि जिन लोगों ने कातिल निमिषा की सजा रुकवाई है, वे लोग जानते हैं कि हमारा परिवार किसी तरह की सुलह करने के लिए तैयार नहीं है। हम लोग सुलह की तमाम कोशिशों को खारिज करते हैं। मामले में जो कुछ भी हो रहा है, उसको लेकर वे कतई विचलित नहीं है। सुलह की कोशिशें पहले भी हो चुकी हैं।

हम सिर्फ बदला चाहते हैं…

महदी ने कहा कि हम लोगों पर भले ही दबाव डाला जा रहा है, लेकिन हम लोगों का मन बिल्कुल भी नहीं बदला है। हम लोग सिर्फ और सिर्फ बदला चाहते हैं। बदले के अलावा कुछ नहीं, चाहे जो मर्जी हो जाए। अब्देल के अनुसार उनके भाई की दोषी महिला को 16 जुलाई को सुबह 9 बजे फांसी के फंदे से लटकाया जाना था। आखिरी समय में सजा को टाल दिया गया। यह सिर्फ इसलिए किया गया है कि ताकि निमिषा का परिवार महदी के परिवार से बात कर सके। ब्लड मनी पर बातचीत का हल निकल जाए। हालांकि महदी के भाई का रुख देख लग रहा है कि शायद ही उसका परिवार इसके लिए राजी होगा।

मुस्लिम धर्मगुरु की वजह से टली सजा

महदी के भाई ने अपनी पोस्ट में निमिषा प्रिया को फंदे पर लटकवाने की कसम खाई है। उसका कहना है कि खून को न खरीदा जा सकता है, न ही न्याय को भुलाया जा सकता है। दोषी को सजा जरूर दिलवाई जाएगी, चाहे रास्ता कितना भी लंबा क्यों न तय करना पड़े। बता दें कि निमिषा की फांसी केरल के एक मुस्लिम धर्मगुरु के हस्तक्षेप की वजह से टाली गई है।

उनकी सजा टलवाने में 94 साल के जेम-इय्यातुल उलम के महासचिव कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार ने हस्तक्षेप किया था। उनको भारत का ग्रैंड मुफ्ती भी कहा जाता है। उनके यमन के प्रभावशाली सूफी धर्मगुरुओं के साथ लंबे समय से मधुर संबंध हैं।

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