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‘EC और बीजेपी मिलकर बंगाली मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा रहे’, ममता बनर्जी का आरोप

नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को एक बड़ी रैली में बीजेपी और उसकी सरकारों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बीजेपी शासित राज्य जैसे असम, महाराष्ट्र और दिल्ली में बंगाली भाषी लोगों को परेशान किया जा रहा है। ममता बनर्जी ने बताया कि असम सरकार ने पश्चिम बंगाल में रह रहे कुछ बंगालियों को नोटिस भेजे हैं, जबकि वे यहीं के नागरिक हैं। उन्होंने इस पर सवाल उठाते हुए कहा, “ये क्या हो रहा है?”

बंगाली मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा रहे

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कुछ राज्यों में लोगों को सिर्फ इसलिए गिरफ्तार किया जा रहा है क्योंकि वे बंगाली भाषा में बात करते हैं। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि एक व्यक्ति को अचानक गिरफ़्तार कर लिया गया और उसकी माँ, पत्नी और बच्चों को भी परेशान किया गया। ममता का कहना है कि यह सब सिर्फ उनकी मातृभाषा बोलने की वजह से हो रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और बीजेपी मिलकर बंगाली मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा रहे हैं।

साथ ही, बाहरी लोगों के नाम लिस्ट में जोड़े जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “एक बंगाली नाम के साथ तीन गुजराती, दो दिल्ली वाले और चार राजस्थान के नाम दिख रहे हैं। यह सब क्यों हो रहा है?” ममता ने कहा कि यह सब 2025 के चुनाव से पहले चुनावी समीकरण बदलने की कोशिश है।

कोलकाता में विरोधी मार्च निकाला 

कोलकाता में उन्होंने एक बड़ा विरोध मार्च निकाला, जिसमें टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी और पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। इस मार्च का उद्देश्य उन बंगालियों के साथ एकजुटता दिखाना था जो पश्चिम बंगाल के बाहर रहते हैं और जिन्हें परेशान किया जा रहा है।

टीएमसी पार्टी ने “एक्स” (पहले ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, “बीजेपी का बंगाली पहचान पर हमला अब खुलकर सामने आ चुका है। यह नफरत से भरा और जानबूझकर किया जा रहा है। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में हर अन्याय का विरोध किया जाएगा।”

टीएमसी ने कुछ घटनाओं के उदाहरण भी दिए

महाराष्ट्र में उत्तर 24 परगना के मतुआ समुदाय के 6 लोगों को वहां की पुलिस ने गिरफ्तार किया, जिनमें नाबालिग भी थे। उनके पास सभी ज़रूरी पहचान पत्र थे, फिर भी उन्हें परेशान किया गया। दिल्ली में जय हिंद कॉलोनी में रह रहे बंगाली भाषी लोगों को ‘अवैध’ कहकर अपमानित किया गया, जबकि उनके पास सभी वैध दस्तावेज़ थे। ममता बनर्जी ने कहा कि यह समय है एकजुट होने का और ऐसे अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने का। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे भाषा और पहचान के नाम पर हो रहे इस भेदभाव का डटकर विरोध करें।

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