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‘मौलानाओं को सड़कों पर दौड़ाकर पीटेंगे और पाकिस्तान छोड़कर आएंगे’, मदनी के बयान पर भड़के BJP नेता संगीत सोम

December 1, 2025

‘मौलानाओं को सड़कों पर दौड़ाकर पीटेंगे और पाकिस्तान छोड़कर आएंगे’, मदनी के बयान पर भड़के BJP नेता संगीत सोम

नेशनल डेस्क: उत्तर प्रदेश के मेरठ में बीजेपी के पूर्व विधायक और अपने बयानों के लिए चर्चा में रहने वाले नेता संगीत सिंह सोम ने मौलाना महमूद मदनी के हाल ही में दिए गए “जहां जुल्म होगा, वहां जिहाद होगा” वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सनातनी ऐसे मौलानाओं को सड़कों पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटेंगे और पाकिस्तान छोड़कर आएंगे। सोम ने कहा कि मदरसों से आतंकी निकलते हैं, इन जगहों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।

मौलानाओं को दौड़ा-दौड़ाकर पीटेंगे

संगीत सोम ने मीडिया से कहा कि मौलाना मदनी की सोच “बीमार” है और वह ऐसे संस्थान से जुड़े हैं जहां से, उनके अनुसार, कई बार कट्टरपंथी विचार फैलते रहे हैं। सोम ने कहा कि मदनी और ऐसे मौलाना संविधान की बातें तो करते हैं, लेकिन कई मुद्दों पर खुद संविधान का पालन नहीं करते।

सोम ने आरोप लगाया कि जब भी देश में आतंक से जुड़ी घटनाएं होती हैं, कुछ लोग उन्हें सही ठहराने की कोशिश करते हैं। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अगर ऐसी बयानबाजी जारी रही तो देश के “सनातनी” लोग सड़कों पर उतर आएंगे और ऐसे मौलानाओं को दौड़ा-दौड़ाकर पीटेंगे और मारते-मारते पाकिस्तान छोड़कर आएंगे।

मदरसों से आतंकी निकलते है: बीजेपी नेता 

संगीत सोम ने आगे कहा कि कुछ लोग शरिया कानून की बात करते हैं, लेकिन जब बात संविधान और बराबरी की आती है, तो वे पीछे हट जाते हैं। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि चार शादी और बहुत ज्यादा बच्चे पैदा करने की बात पर संविधान याद नहीं आता, लेकिन जिहाद का मुद्दा उठाते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि दुनिया में मुसलमान सबसे सुरक्षित भारत में हैं, लेकिन फिर भी कुछ लोग पाकिस्तान की भाषा बोलते हैं। सोम ने यहां तक कह दिया कि मदरसों से आतंकवादी निकलते हैं और ऐसी जगहों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

मौला­ना मदनी का बयान

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने एक कार्यक्रम में कहा था कि “जहां जुल्म होगा, वहां जिहाद होगा।” उन्होंने कुछ अदालतों के फैसलों जैसे बाबरी मस्जिद और तलाक से जुड़े फैसले पर सवाल उठाए। मदनी के अनुसार, कुछ फैसले ऐसे हैं जिनसे लगता है कि न्यायपालिका सरकार के दबाव में काम कर रही है। मदनी का कहना था कि कई फैसलों में अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है और इस पर चर्चा जरूरी है।

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