नेशनल डेस्क: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि तमिलनाडु में हिंदुओं की बढ़ती जागृति थिरुपरनकुंद्रम मामले में मनचाहा नतीजा लाने के लिए पर्याप्त है। उन्होंने यह भी कहा कि मामला अभी कोर्ट में है, इसलिए इसे जरूरत से ज्यादा बढ़ाने की शायद आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
थिरुपरनकुंद्रम में हुआ क्या था?
पिछले हफ्ते कार्तिगई दीपम त्योहार के दौरान वहां तनाव हो गया। एक राइट-विंग संगठन के कार्यकर्ताओं की पुलिस से झड़प हो गई। मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने आदेश दिया था कि पहाड़ी पर बने मंदिर की चोटी पर पारंपरिक दीया जलाया जाए। लेकिन सरकारी अधिकारियों ने कहा कि परंपरा के मुताबिक दीया पास के दीपा मंडपम में जलाया जाता है, और इसे बदलना रिवाज के खिलाफ है। जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने एक राइट-विंग कार्यकर्ता की याचिका पर यह निर्देश दिया था कि दीया ऊपर ही जलाया जाए। इसी निर्णय को लेकर विवाद बढ़ा।
मोहन भागवत ने क्या कहा?
“100 साल की संघ यात्रा – न्यू होराइजन्स” कार्यक्रम में सवालों का जवाब देते हुए भागवत ने कहा, अगर जरूरत होगी तो मामला आगे बढ़ाया जाएगा, लेकिन फिलहाल इसकी आवश्यकता नहीं दिखती। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के हिंदू संगठन अगर संकेत देंगे तो RSS इस पर आगे की रणनीति सोचेगा। उनका मानना है कि यह विवाद स्थानीय स्तर पर ही हिंदू समाज की शक्ति से सुलझ सकता है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “मुद्दा हिंदुओं के पक्ष में ही सुलझना चाहिए, और इसके लिए जो करना होगा, किया जाएगा।”
इंपीचमेंट विवाद
बुधवार को इंडिया ब्लॉक के 100 से ज्यादा सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र देकर जस्टिस स्वामीनाथन के खिलाफ इंपीचमेंट (महाभियोग) की मांग की। जस्टिस स्वामीनाथन ने सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर के अधिकारियों को पहाड़ी की चोटी पर एक दरगाह के पास पत्थर के खंभे पर दीया जलाने का आदेश दिया था, जो विवाद का मूल कारण बना।
अमित शाह की प्रतिक्रिया
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर “तुष्टिकरण राजनीति” करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद पहली बार किसी जज के एक फैसले पर इंपीचमेंट की मांग की जा रही है। शाह ने आरोप लगाया कि विपक्ष यह सब अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें हैरानी हुई कि शिवसेना (UBT) ने भी इस पिटीशन पर साइन किए।

