नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को कहा कि मुर्शिदाबाद में अप्रैल में हुई हिंसा एक सोची-समझी और सुनियोजित साजिश थी। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग राज्य में सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बंगाल ऐसे तत्वों को बर्दाश्त नहीं करेगा।
मैं दंगे के खिलाफ हूं, धर्म के नहीं: ममता बनर्जी
मुख्यमंत्री ने हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा करते हुए कहा, “जब मैं कोई राजनीतिक काम करती हूं, तो सभी धर्मों के लोग मेरे लिए एक समान हैं। मैं किसी धर्म के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन दंगों के खिलाफ हूं।” उन्होंने यह भी कहा कि “घटना के एक दिन के भीतर राष्ट्रीय महिला आयोग तो पहुंच गया, लेकिन मणिपुर, यूपी और राजस्थान की घटनाओं पर वह चुप रहा।”
बीएसएफ ने गोली नहीं चलाती हो हिंसा नहीं बढ़ती
ममता बनर्जी ने बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर बीएसएफ ने गोली नहीं चलाई होती, तो हिंसा और न बढ़ती। उन्होंने कहा, “मैं भाजपा से कहना चाहती हूं कि वो सीमाओं की सुरक्षा पर ध्यान दे, न कि दंगे भड़काने पर।” भाजपा द्वारा देर से दौरे के आरोपों पर ममता ने कहा कि वह पहले भी मुर्शिदाबाद जा सकती थीं, लेकिन स्थिति सामान्य होने का इंतजार कर रही थीं। उन्होंने कहा, “मैं किसी धार्मिक कार्यक्रम में व्यस्त थी, और नहीं चाहती थी कि मेरी उपस्थिति से तनाव और बढ़े।” उन्होंने बेहरामपुर और धुलियान में प्रभावितों से मुलाकात की और मुआवजे का ऐलान किया।
हिंदुओं पर हमले के वक्त चुप क्यों थीं ममता?
भाजपा नेता दिलीप घोष ने ममता के दौरे को “बहुत देर से उठाया गया कदम” बताया और आरोप लगाया कि “जब हिंदू समुदाय के लोगों को निशाना बनाया गया, उनके घर जलाए गए, तब मुख्यमंत्री चुप रहीं। अब वह तब जा रही हैं जब सबूत मिटाए जा चुके हैं।”
क्या है मामला?
मुर्शिदाबाद में 11 अप्रैल को वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इस दौरान दो लोगों की मौत हो गई थी जबकि कई गंभीर रुप से घायल हुए थे। इस हिंसा में सैकड़ों घर और दुकानें जलाए गए, कई परिवार सुरक्षा के लिए घर छोड़ने को मजबूर हुए।

