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नक्सलियों ने डेढ़ टन विस्फोटक से भरे ट्रक को लूटा, हाई अलर्ट पर झारखंड और ओडिशा की पुलिस

नेशनल डेस्क: ओडिशा के राउरकेला में नक्सलियों ने एक बार फिर अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी है। नक्सलियों ने एक ट्रक को लूट लिया, जिसमें डेढ़ टन विस्फोटक भरे हुए थे। यह घटना ओडिशा के केबलांग थाना क्षेत्र में हुई, जब ट्रक बांको पत्थर खदान की ओर जा रहा था। नक्सलियों ने ट्रक को रोककर उसके चालक को बंधक बना लिया और फिर उसे सारंडा के घने जंगल की ओर ले गए। इस घटना के बाद से झारखंड और ओडिशा पुलिस अलर्ट हो गई है और सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

नक्सलियों की बढ़ती चुनौती
नक्सलवाद भारत के कई राज्यों, विशेषकर छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, और महाराष्ट्र में एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ कई सफल ऑपरेशन चलाए हैं, जिनमें कई बड़े नक्सली कमांडर मारे गए हैं या उन्होंने आत्मसमर्पण किया है। हालांकि, नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई अभी भी जारी है, और कई प्रमुख नक्सली फरार हैं, जो सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों की कार्रवाई
सुरक्षा बलों ने हाल के वर्षों में नक्सलियों के खिलाफ कई बड़े ऑपरेशन चलाए हैं। 2025 में छत्तीसगढ़ में नारायणपुर जिले में हुए एक बड़े एनकाउंटर में नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) के महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ बसवराज को मार गिराया गया। उस पर 10 करोड़ रुपये का इनाम था। इसके अलावा, बीजापुर और कांकेर में 113 नक्सली मारे गए, 104 गिरफ्तार हुए और 164 ने आत्मसमर्पण किया।

झारखंड में भी नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। 2021 से 2025 तक 1490 नक्सली गिरफ्तार किए गए हैं। इसके अलावा, सारंडा के जंगलों में नक्सलियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसका लक्ष्य 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करना है।

मुख्य नक्सली कमांडर और उनके इनाम
माडवी हिडमा, जो नक्सलियों का प्रमुख कमांडर है, पर 45 लाख से 1 करोड़ रुपये तक का इनाम है। इसके अलावा, झारखंड में असीम मंडल, पतिराम मांझी, और मिसिर बेसरा जैसे नक्सलियों पर 1-1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित है। जबकि अन्य कमांडरों जैसे सुजाता पर 25 लाख से 2 लाख रुपये तक का इनाम है।

नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों की तेज कार्रवाई
सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और तेज कर दिया है। 2026 तक नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन माडवी हिडमा जैसे नक्सली कमांडरों के गुप्त ठिकानों और उनकी जंगलों में मौजूदगी अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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