Last Updated: October 21, 2026

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मेरा एक भाई जेल में है और दूसरा मुजाहिदीन… कैमरे के सामने आई पहलगाम हमले के आतंकी की बहन

April 25, 2025

मेरा एक भाई जेल में है और दूसरा मुजाहिदीन… कैमरे के सामने आई पहलगाम हमले के आतंकी की बहन

नेशनल डेस्क: पहलगाम आतंकी हमले के बाद सुरक्षा बलों और जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। शुक्रवार को दो आतंकियों के घरों को गिरा दिया गया। इसी बीच त्राल में आतंकी आसिफ शेख की बहन का बयान सामने आया है। उन्होंने बताया कि मेरा एक भाई जेल में बंद है और दूसरा मुजाहिदीन है। हमारे घर को बम से उड़ा दिया गया।

क्या कहा आतंकी की बहन ने?
आसिफ शेख की बहन ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा, “मेरा एक भाई जेल में है और दूसरा मुजाहिदीन है। मैं अपने ससुराल में थी, जब लौटी तो देखा कि मेरी मां और दो बहनों को पुलिस पहले ही ले जा चुकी थी। बाद में सुरक्षा बल आए और हमें घर से बाहर निकाल दिया। मैंने देखा कि एक फौजी वर्दी वाला आदमी स्टोर में कुछ बम जैसा रख रहा था। थोड़ी देर में हमारे घर को बम से उड़ा दिया गया।”

 

कहां और कैसे हुई कार्रवाई?
बिजबेहरा में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी आदिल हुसैन के घर को आईईडी (बम) से उड़ाया गया। वहीं, त्राल में आतंकी आसिफ शेख के घर को बुलडोजर से गिराया गया है।

बेटे को मिले कड़ी सजा: आदिल की मां 
पहलगाम आतंकी हमले में शामिल आदिल की मां का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा, देर रात हमारे घर में फोर्स आई, फिर हमें बाहर निकाला और घर को ब्लास्ट से उड़ा दिया। आदिल की मां ने कहा कि पर्यटकों पर जो हमला हुआ, वह गलत है। वो बेगुनाह थे, ऐसा नहीं करना चाहिए था। हमले में शामिल आरोपियों को कड़ी सजा मिलने चाहिए चाहे मेरा बेटा क्यों न हो।

आतंकियों पर 20 लाख का इनाम 
अनंतनाग पुलिस ने हमले में शामिल आतंकियों पर 20 लाख रुपये का इनाम रखा है। इन आतंकियों में शामिल हैं, आदिल हुसैन (स्थानीय आतंकी), अली भाई (पाकिस्तानी आतंकी) और तीसरा हाशिम मूसा (पाकिस्तानी आतंकी)। तीनों के स्केच भी जारी किए गए हैं। बताया गया है कि अली और मूसा करीब दो साल से घाटी में सक्रिय हैं। सुरक्षा बल चार से पांच आतंकियों की तलाश में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।

हमले में 26 लोगों की मौत 
बता दें कि, यह हमला मंगलवार, 22 अप्रैल को पहलगाम घाटी में हुआ था। इस अटैक में 26 लोगों की मौत हुई, जिनमें दो विदेशी नागरिक भी थे। आतंकी धर्म पूछकर गोली मार रहे थे, लेकिन महिलाओं और बच्चों को नहीं मारा। हमले का मकसद दहशत फैलाने के साथ-साथ सामाजिक तनाव बढ़ाना भी था।

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