जम्मू-कश्मीर: भारत को लंबे समय से जिसकी तलाश थी, पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड हाशिम मूसा को आखिरकार सेना ने ढेर कर दिया। 28 जुलाई को श्रीनगर के लिडवास जंगल में हुए एनकाउंटर में हाशिम और उसके दो साथियों को मार गिराया गया। यह मुठभेड़ 96 दिनों तक चली गुप्त कार्रवाई ‘ऑपरेशन महादेव’ का हिस्सा थी।
हाशिम मूसा का पूरा नाम सुलैमान शाह उर्फ हाशिम मूसा फौजी था। मूसा लश्कर-ए-तैयबा का शीर्ष कमांडर, पहले पाकिस्तान की SSG (स्पेशल सर्विस ग्रुप) का कमांडो था। वह 2022 में जम्मू-कश्मीर में दाखिल हुआ, कई हमलों की साजिश में शामिल था।
हाशिम मूसा पहलगाम आतंकी हमले का मास्टरमांइड था, इस हमले में 26 पर्यटकों को मौत के घाट उतार दिया था। साल 2024 में सोनमर्ग टनल अटैक में 7 नागरिक मारे गए थे। हाशिम पर भारत सरकार ने ₹10 लाख का इनाम घोषित किया था। पाकिस्तानी पासपोर्ट और सैटेलाइट फोन के जरिए मूसा ISI से संपर्क में था।
सेना ने ड्रोन, थर्मल कैमरे, और ह्यूमन इंटेलिजेंस (HUMINT) से मूसा की मूवमेंट ट्रैक की वह लगातार दाचीगाम और लिडवास के जंगलों में छिपता रहा। सेना के जवनानों ने 28 जुलाई को सुबह लिडवास इलाके को घेरा और मूसा-उसके साथियों पर फायरिंग शुरू कर दी। 6 घंटे की मुठभेड़ के बाद तीनों आतंकवादी मारे गए। सेना ने उनके पास से AK-47, ग्रेनेड, IED, पाकिस्तानी पासपोर्ट, और सैटेलाइट फोन बरामद किया। हाशिम मूसा की मौत से लश्कर-ए-तैयबा को गहरा झटका लगा है। उसके मारे जाने से कई आतंकी साजिशें नाकाम हो सकती हैं।
भारतीय सेना ने इस आपरेशन में मेड-इन-इंडिया ड्रोन और रडार का उपयोग किया। रात में भी गतिविधियों को पकड़ा गया थर्मल कैमरे से। ऑपरेशन के दौरान किसी आम नागरिक को कोई नुकसान नहीं हुआ। सेना ने पहले पूरे इलाके को सील किया और लोगों को सुरक्षित निकाला।
हाशिम मूसा की मौत ने दिखाया कि भारत अब आतंकवादियों को पनपने नहीं देगा। यह संदेश भी गया कि सेना हर हमले का जवाब देगी, चाहे उसे कितना भी वक्त और तैयारी क्यों न करनी पड़े। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह ऑपरेशन भारत की सटीक कार्रवाई और मजबूत इरादे को दर्शाता है