नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस और INDIA ब्लॉक पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने विपक्ष की ओर से 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली रैली के फैसले पर सवाल उठाए। त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि विपक्ष का मुख्य उद्देश्य सत्ता हासिल करना, समाज में विभाजन पैदा करना और देश के लोकतांत्रिक संस्थानों को लेकर लोगों के बीच भ्रम फैलाना है।
शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि विपक्ष की राजनीति सत्ता की लालसा और देश के सामाजिक व सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति विरोध की भावना से प्रेरित है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 10 से 12 वर्षों में विपक्ष ने देश के लगभग हर संस्थान और व्यवस्था पर सवाल उठाकर भ्रम पैदा करने की कोशिश की है। त्रिवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी विपक्ष की इस सोच को लेकर कई बार अपनी बात रख चुके हैं। उनके मुताबिक, विपक्ष की राजनीति का मकसद सत्ता में आकर फायदा उठाना और समाज को बांटना है।
1 नवंबर की रैली के समय पर भी उठाए सवाल
BJP सांसद ने कांग्रेस की ओर से 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली INDIA ब्लॉक की रैली के समय पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिस इलाके में रैली आयोजित की जा रही है, वह केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि उत्तर भारत के व्यापार और कारोबार के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण है।
त्रिवेदी के मुताबिक, नवरात्रि से लेकर दिवाली और छठ पूजा तक त्योहारों का समय कारोबारियों के लिए बेहद अहम होता है। ऐसे में इस दौरान बड़ी रैली आयोजित करने से व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस ने त्योहारों के इस व्यस्त समय में ही रैली आयोजित करने का फैसला क्यों किया है।
भारत की आर्थिक तरक्की को कमजोर करने की साजिश का आरोप
सुधांशु त्रिवेदी ने भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होती पहचान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में तेजी से आगे बढ़ रहा है और वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। ऐसे में कुछ अंतरराष्ट्रीय ताकतें भारत की इस प्रगति से खुश नहीं हो सकतीं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के भीतर और बाहर कुछ ऐसी ताकतें सक्रिय हो सकती हैं, जो भारत की आर्थिक रफ्तार और भविष्य की संभावनाओं को कमजोर करना चाहती हैं।
राहुल गांधी और कांग्रेस पर भी साधा निशाना
BJP सांसद ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति रवैया सवालों के घेरे में है। त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब भी वह अपनी पसंद के खिलाफ होने वाले राजनीतिक और संवैधानिक फैसलों को आसानी से स्वीकार नहीं करती थी। अब विपक्ष में रहने के बावजूद पार्टी का यही रवैया जारी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संस्थाओं का सम्मान करना जरूरी है, लेकिन कांग्रेस लगातार इन संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती रहती है।
SIR प्रक्रिया पर चुनाव आयोग का बचाव
वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर भी सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने चुनाव आयोग की प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि मतदाता सूची को सही और अपडेट रखने के लिए चुनाव आयोग बड़े स्तर पर काम करता है। उन्होंने बताया कि देशभर में करीब 12 लाख बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) नियुक्त किए गए हैं। इनका काम मतदाता सूची में नए नाम जोड़ना और नियमों के अनुसार गलत या अपात्र नामों को हटाने की प्रक्रिया को पूरा करना है।
त्रिवेदी के अनुसार, यदि किसी मतदाता से उसके पंजीकृत पते पर संपर्क नहीं हो पाता है, तो BLO को कम से कम तीन बार उस पते पर जाना होता है। उन्होंने यह भी बताया कि राजनीतिक दलों को भी अपने बूथ लेवल एजेंट (BLA) नियुक्त करने का अधिकार है, जो मतदाता सूची की जांच और सुधार प्रक्रिया पर नजर रखते हैं।
कांग्रेस के अपने बूथ लेवल एजेंट पर उठाए सवाल
सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर पार्टी का दावा है कि उसकी जानकारी के बिना मतदाता सूची से नाम हटाए गए या नए नाम जोड़ दिए गए, तो क्या वह अपने ही बूथ लेवल एजेंट की कार्यक्षमता पर सवाल उठा रही है? उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी को लेकर आपत्ति दर्ज कराने के कई मौके दिए जाते हैं।
त्रिवेदी के मुताबिक, मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया में पहले बूथ स्तर पर काम होता है। इसके बाद राज्य स्तर पर आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं। अंत में चुनाव आयोग के सामने भी शिकायत और आपत्ति रखने का विकल्प मौजूद रहता है। उन्होंने सवाल किया कि अगर कांग्रेस को इस पूरी प्रक्रिया में गड़बड़ी नजर आती है, तो उसे सबसे पहले अपने बूथ लेवल एजेंट, जिला अध्यक्षों और राज्य इकाइयों से जवाब मांगना चाहिए।

