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‘कांग्रेस की सोच ने देश को दशकों पीछे रखा’, राहुल गांधी के बयान पर पीयूष गोयल का पलटवार

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नई दिल्ली: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस और उसके नेताओं पर देश की उपलब्धियों को कम करके दिखाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की नकारात्मक सोच ने भारत को कई दशकों तक पीछे रखा और अब देश की जनता उस मानसिकता को अच्छी तरह समझ चुकी है।

पीयूष गोयल यह बयान कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस बयान के जवाब में दे रहे थे, जिसमें राहुल गांधी ने कहा था कि “भारतीय अर्थव्यवस्था मर चुकी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे मार डाला है।” राहुल गांधी ने यह टिप्पणी 31 जुलाई 2025 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर की थी।

“कांग्रेस नेता देश को छोटा दिखाते हैं”

पीयूष गोयल ने कहा कि हाल ही में यूरोपीय यूनियन (EU) के शीर्ष नेताओं ने भारत के साथ रिश्ते मजबूत करने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि दुनिया भारत की प्रगति को मान रही है, लेकिन देश के भीतर कुछ नेता जैसे राहुल गांधी और जयराम रमेश हमेशा भारत को नकारात्मक नजरिए से देखते हैं। गोयल ने कहा, “कांग्रेस पार्टी की वही पुरानी सोच थी, जिसने देश को दशकों तक पीछे रखा। अब देश का कोई भी समझदार नागरिक कांग्रेस के बहकावे में नहीं आने वाला।”

भारत-EU FTA पर कांग्रेस पर निशाना

पीयूष गोयल ने भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर भी कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 2006 में इस समझौते पर बातचीत शुरू की थी और 2007 में इसे औपचारिक रूप से लॉन्च भी किया, लेकिन कई सालों तक सत्ता में रहने के बावजूद इसे पूरा नहीं कर पाई। कांग्रेस नेता जयराम रमेश द्वारा भारत-EU FTA पर की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए गोयल ने कहा कि यह स्थिति “अंगूर खट्टे हैं” जैसी है, यानी जो काम कांग्रेस नहीं कर पाई, उस पर अब आलोचना कर रही है।

जयराम रमेश को बताया “विकास विरोधी”

पीयूष गोयल ने जयराम रमेश पर यह आरोप भी लगाया कि जब वे पर्यावरण मंत्री थे, तब उन्होंने देश की विकास परियोजनाओं में कई बार रुकावट डाली। गोयल ने उन्हें “विकास विरोधी” सोच वाला नेता बताया।

चीन और RCEP को लेकर सवाल

गोयल ने कांग्रेस से यह भी पूछा कि वह कैसे चीन के साथ FTA जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सोच सकती थी, जिससे भारत के आर्थिक हितों को नुकसान पहुंच सकता था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कांग्रेस सरकार ने भारत को RCEP (क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी) में शामिल करने पर कैसे विचार किया, जबकि यह समझौता भारत और चीन के बीच व्यापार संतुलन को बिगाड़ सकता था।

RCEP से भारत क्यों बाहर रहा

4 नवंबर 2019 को बैंकॉक में हुए RCEP नेताओं के शिखर सम्मेलन में भारत ने साफ किया कि RCEP का मौजूदा ढांचा भारत के हितों और चिंताओं को ठीक से नहीं दर्शाता। इसी कारण भारत ने इस समझौते में शामिल न होने का फैसला किया। सरकार का कहना था कि इस समझौते से भारतीय किसानों, उद्योगों और छोटे व्यापारियों को नुकसान हो सकता था।

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