नेशनल डेस्क: 12 जून को अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे की जांच की निष्पक्षता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन नामक संस्था ने आरोप लगाया है कि 260 लोगों की मौत वाली इस दुर्घटना की जांच पारदर्शी और निष्पक्ष नहीं हो रही है। इस याचिका पर कोर्ट ने केंद्र सरकार, नागरिक उड्डयन निदेशालय (DGCA) और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) से जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता की दलीलें
याचिकाकर्ता के पक्ष में वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि जांच में DGCA की भूमिका संदिग्ध है क्योंकि जांच टीम में DGCA के तीन अधिकारी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि हादसे के एकमात्र जीवित गवाह के बयान को प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया है। भूषण ने आरोप लगाया कि जांच रिपोर्ट के केवल चुनिंदा हिस्से को जारी किया गया, जिसमें तकनीकी और मशीनी खामियों को नजरअंदाज कर केवल पायलट की गलती को उजागर किया गया है। उन्होंने निष्पक्ष जांच टीम गठित करने और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
कोर्ट ने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट में केवल पायलट की गलती पर चर्चा होना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन सभी जानकारियां सार्वजनिक करने की मांग उचित नहीं लगती। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि अंतिम जांच रिपोर्ट में सभी प्रश्नों के जवाब मिलेंगे। कोर्ट ने याचिका में उठाई गई चिंताओं को मानते हुए सरकार और संबंधित एजेंसियों से जवाब तलब किया है। यह नोटिस सिर्फ इस बात को लेकर है कि क्या जांच स्वतंत्र, निष्पक्ष और तेज हो रही है।
कब हुआ विमान हादसा?
12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रहा एयर इंडिया का बोइंग विमान टेकऑफ़ के तुरंत बाद गिर गया था, जिसमें विमान में सवार 241 लोगों की मौत हो गई थी। विमान के गिरने से जमीन पर भी 19 लोग मारे गए थे। दुर्घटना को 100 दिन से अधिक हो चुके हैं, लेकिन अब तक जांच पूरी तरह पारदर्शी और स्पष्ट नहीं हुई है। याचिका में सवाल उठाए गए हैं कि इस हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है और पूरी सच्चाई कब सामने आएगी।

