नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को हूल दिवस के मौके पर संथाल क्रांति के वीर नायकों को याद किया और उन्हें सम्मान दिया। उन्होंने सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो जैसे महान नेताओं को नमन किया, जिन्होंने विदेशी शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।
उनकी वीरता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा कि हूल दिवस हमें आदिवासी समाज की बहादुरी और वीरता याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि ये नायक विदेशी शासन के अत्याचारों के खिलाफ लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दे चुके हैं। उनकी वीरता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।
हूल क्रांति और हूल दिवस का महत्व
हूल क्रांति दिवस हर साल 30 जून को मनाया जाता है। यह दिन उन बहादुर आदिवासियों की याद में होता है, जिन्होंने 1855 में ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। इसी दिन आदिवासी नेताओं सिद्धू-कान्हो और चांद-भैरव ने झारखंड के भोगनाडीह में करीब 50,000 आदिवासियों का नेतृत्व करके अंग्रेजों की शोषणकारी नीतियों के खिलाफ विद्रोह किया था।
BJP सांसद का आरोप
इस बीच, भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने हूल दिवस पर झारखंड सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड की कांग्रेस सरकार ने भोगनाडीह में सिदो कान्हो के वंशज मंडल मुर्मू और उनके परिवार पर हमला किया। इसमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल थे। निशिकांत दुबे ने एक्स पर लिखा कि यह हमला आदिवासियों के प्रति नफ़रत दिखाता है और सवाल उठाया कि क्या आज़ादी के नायकों के परिवारों के साथ ऐसा व्यवहार ठीक है।

