नेशनल डेस्क: ग्रेटर नोएडा में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की डूबने से हुई मौत के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस केस में नामजद बिल्डर अभय कुमार को नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि जांच में युवराज की मौत में बिल्डर की भूमिका सामने आने के बाद यह गिरफ्तारी की गई है।
इस मामले को लेकर प्रशासन भी हरकत में आ गया है। प्राधिकरण में हुई एक अहम बैठक के बाद एसआईटी (विशेष जांच टीम) ने जांच तेज कर दी है। एडीजी भानु भास्कर ने बताया कि संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की जा चुकी है और अब मृतक युवराज के परिजनों के बयान दर्ज किए जाएंगे। सभी तथ्यों के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या अन्य अधिकारियों की लापरवाही भी इस हादसे की वजह बनी।
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दो घंटे तक मदद के लिए चिल्लाता रहा युवराज
हादसा रात करीब 11:45 बजे हुआ, जब युवराज की कार पानी में जा गिरी। बताया जा रहा है कि युवराज करीब दो घंटे तक डूबती कार में फंसा रहा और मदद के लिए आवाज़ लगाता रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय पर सही रेस्क्यू होता, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।
सूचना मिलने पर रात 12:06 बजे फायर ब्रिगेड को कॉल किया गया। करीब 12:25 बजे तीन दमकल वाहन मौके पर पहुंचे। पूरी रात रेस्क्यू ऑपरेशन चलता रहा, लेकिन एसडीआरएफ की टीम तड़के करीब 3:30 से 4:00 बजे के बीच पहुंची। तब तक बहुत देर हो चुकी थी और युवराज को बचाया नहीं जा सका।
स्थानीय व्यक्ति ने दिखाई बहादुरी, लेकिन बचाव नहीं हो सका
जब सरकारी स्तर पर कोई गोताखोर पानी में नहीं उतरा, तब एक स्थानीय व्यक्ति ने साहस दिखाया। उसने अपनी कमर में रस्सी बांधकर लगभग 50 मीटर तक पानी में जाने की कोशिश की, लेकिन युवराज का पता नहीं चल सका। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर मौजूद थीं, लेकिन हालात के मुताबिक तेजी से और प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। हैरानी की बात यह है कि हादसे के चार दिन बीत जाने के बाद भी युवराज की कार को पानी से बाहर नहीं निकाला जा सका है। इससे प्रशासन और आपदा प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
डीएम की गैरमौजूदगी पर भी सवाल
आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी जिले के डीएम की होती है, लेकिन नोएडा की डीएम मेधा रूपम चार दिन बाद भी घटनास्थल पर नहीं पहुंचीं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि डीएम को खुद मौके पर रहकर रेस्क्यू की निगरानी करनी चाहिए थी, लेकिन केवल एक एसडीएम औपचारिक दौरे के लिए पहुंचे।
फिलहाल एसआईटी पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। यह भी देखा जा रहा है कि युवराज को समय पर मदद क्यों नहीं मिल पाई और किन-किन लोगों की लापरवाही से एक युवा इंजीनियर की जान चली गई। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी कार्रवाई हो सकती है।
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