नई दिल्ली: 2017 के उन्नाव रेप केस में पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत मिलने के बाद कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे “निराशाजनक और शर्मनाक” बताया और कहा कि इस तरह के फैसलों से न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होता है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए सवाल उठाया कि क्या गैंगरेप पीड़िता के साथ ऐसा व्यवहार सही है। उन्होंने कहा कि पीड़िता की कोई गलती नहीं है, सिवाय इसके कि उसने न्याय के लिए आवाज़ उठाने की हिम्मत दिखाई। इसके बावजूद उसे बार-बार परेशान किया जा रहा है और वह डर के माहौल में जीने को मजबूर है। राहुल गांधी ने लिखा कि जब बलात्कार के दोषी को जमानत मिल जाती है और पीड़िता के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार होता है, तो यह न्याय प्रणाली की गंभीर विफलता को दिखाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे फैसले लोकतंत्र और समाज दोनों के लिए खतरनाक हैं।
क्या एक गैंगरेप पीड़िता के साथ ऐसा व्यवहार उचित है?
क्या उसकी “गलती” ये है कि वो न्याय के लिए अपनी आवाज़ उठाने की हिम्मत कर रही है?
उसके अपराधी (पूर्व BJP MLA) को ज़मानत मिलना बेहद निराशाजनक और शर्मनाक है – खासकर तब, जब पीड़िता को बार-बार प्रताड़ित किया जा रहा हो, और वो डर के… https://t.co/BZqrVNXMOy
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) December 24, 2025
उन्होंने आगे कहा, “हम सिर्फ एक मृत अर्थव्यवस्था नहीं बन रहे हैं, बल्कि ऐसी अमानवीय घटनाओं के कारण हम एक मृत समाज भी बनते जा रहे हैं। लोकतंत्र में असहमति और न्याय की मांग करना अपराध नहीं, बल्कि अधिकार है। पीड़िता सम्मान, सुरक्षा और न्याय की हकदार है।”
इस मामले में पीड़िता की मां ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि जब उन्हें और उनकी दो बेटियों को CRPF की गाड़ी में ले जाया जा रहा था, तो उन्हें अचानक सड़क किनारे उतार दिया गया और सुरक्षा गार्ड उनकी बेटियों को अपने साथ ले गए। उन्होंने दावा किया कि उनका परिवार सुरक्षित नहीं है और कुलदीप सेंगर की जमानत रद्द की जानी चाहिए।
एक दिन पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत दी थी। वह नाबालिग के रेप मामले में दोषी ठहराए गए थे और उम्रकैद की सजा काट रहे थे। हाई कोर्ट ने उनकी अपील पर फैसला आने तक सज़ा पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने उन्हें 15 लाख रुपये का बेल बॉन्ड जमा करने का आदेश दिया है।
हालांकि, सेंगर अभी जेल में ही रहेंगे क्योंकि पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में उन्हें अब तक जमानत नहीं मिली है, जिसमें उन्हें 10 साल की सज़ा सुनाई गई थी। हाई कोर्ट ने यह भी शर्त रखी है कि कुलदीप सेंगर उस 5 किलोमीटर के इलाके में नहीं जाएंगे जहां पीड़िता दिल्ली में रहती है। उन्हें दिल्ली में ही रहना होगा और वे पीड़िता या उसके परिवार से किसी भी तरह का संपर्क नहीं कर सकेंगे।
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