नई दिल्ली: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने लोगों को बड़ी राहत दी है। RBI ने रेपो रेट को 0.25% (25 bps) घटाकर 5.50% से 5.25% कर दिया है। इसका ऐलान गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को किया।
EMI क्यों होगी कम?
रेपो रेट वह ब्याज दर होती है, जिस पर RBI देश के बैंकों को लोन देता है। अब जब RBI ने यह दर घटा दी है, तो बैंकों को सस्ता लोन मिलेगा। इससे वे ग्राहकों को भी सस्ता लोन देंगे। यानी होम लोन सस्ते होंगे, कार लोन की EMI कम होगी और पर्सनल लोन का बोझ भी घटेगा। इसका सीधा फायदा आपकी जेब पर पड़ेगा, क्योंकि हर महीने की EMI कम हो जाएगी और बचत बढ़ेगी।
इस साल कुल कितना घटा रेपो रेट?
RBI फरवरी से जून 2025 तक चार बार में कुल 1.00% (100 bps) रेपो रेट घटा चुका है। पहले 6.5% था… अब लगातार कटौती के बाद यह 5.25% रह गया है। अगस्त और अक्टूबर की बैठकों में कोई बदलाव नहीं किया गया था।
‘गोल्डीलॉक्स’ जोन में इकोनॉमी
RBI गवर्नर ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था इस समय “गोल्डीलॉक्स पीरियड” में है। इसका मतलब महंगाई काबू में है, ग्रोथ (विकास दर) अच्छी चल रही है। न बहुत तेज, न बहुत धीमी- सब कुछ बैलेंस्ड है। यह स्थिति देश की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है।
क्या होता है गोल्डीलॉक्स पीरियड?
जैसे कहानी में गोल्डीलॉक्स को एक कटोरे का दलिया “न ज्यादा गर्म, न ज्यादा ठंडा, बस ठीक” लगता है, वैसे ही जब देश की अर्थव्यवस्था भी न बहुत गरम (महंगाई अधिक) हो और न ठंडी (ग्रोथ बहुत कम), तो उसे गोल्डीलॉक्स पीरियड कहा जाता है।
क्या होता है रेपो रेट?, आसान भाषा में समझें
रेपो रेट = वह ब्याज दर जिस पर RBI बैंकों को लोन देता है।
रेपो रेट बढ़ेगा- लोन महंगा – EMI बढ़ेगी।
रेपो रेट घटेगा – लोन सस्ता – EMI कम।
जब महंगाई ज्यादा बढ़ती है, तो RBI रेपो रेट बढ़ाता है ताकि लोन महंगे हों और मार्केट में नकदी कम हो जाए।

