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भूकंप के तेज झटकों से कांपा रूस… दहशत में लोग घरों से भागे, 8.8 रही तीव्रता, सुनामी का अलर्ट जारी

Russia Earthquake : रूस के सुदूर पूर्वी कामचटका प्रायद्वीप में बुधवार सुबह एक भयावह भूकंप दर्ज किया गया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 8.8 मापी गई। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, यह भूकंप पेट्रोपावलोव्स्क-कामचात्स्की शहर से 133 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में आया और इसकी गहराई 74 किलोमीटर रही।

इस ज़ोरदार भूकंप ने ज़मीन को बुरी तरह हिला दिया और पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया। भूकंप के तुरंत बाद रूस, जापान और अमेरिका के हवाई द्वीप समूह में सुनामी चेतावनी जारी कर दी गई।

सुनामी की लहरें…जापान और कुरील द्वीप हुए प्रभावित

जापान और रूस के कुरील द्वीपों पर सुनामी की लहरें टकरा चुकी हैं। जापान ने फुकुशिमा परमाणु संयंत्र को एहतियात के तौर पर खाली करा दिया है। जापानी मौसम विज्ञान एजेंसी ने प्रशांत तटों पर 1 मीटर तक ऊंची लहरों की चेतावनी दी है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रीय मौसम सेवा ने हवाई में समुद्र स्तर में असामान्य उतार-चढ़ाव की आशंका जताई है।

वीडियो में कैद हुए भूकंप के भयावह पल

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो इस आपदा की गंभीरता को बयां कर रहे हैं। एक वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक घर के अंदर फर्नीचर हिल रहा है, दीवारें कांप रही हैं और लोग चीखते हुए बाहर भाग रहे हैं।

कुछ क्लिप्स में बहुमंज़िला इमारतें झूलती हुई दिख रही हैं। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, कई इमारतों को आंशिक क्षति हुई है, हालांकि अब तक किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है।

अलर्ट पर स्थानीय प्रशासन… राहत कार्य शुरू

रूसी प्रशासन ने आपातकालीन सेवाओं को तैनात कर दिया है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव दल भेजे गए हैं। लोगों को ऊंचे स्थानों की ओर जाने की सलाह दी गई है। स्कूल, दफ्तर और सार्वजनिक परिवहन तत्काल प्रभाव से बंद कर दिए गए हैं।

जापान और हवाई में भी तटीय गांवों से लोगों को हटाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि उथले भूकंपों में सुनामी का खतरा अधिक होता है, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।

क्या ‘पैसिफिक रिंग ऑफ फायर’ बन रहा है खतरा?

कामचटका प्रायद्वीप ‘पैसिफिक रिंग ऑफ फायर’ का हिस्सा है, जो दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय और ज्वालामुखीय क्षेत्रों में गिना जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह भूकंप इस क्षेत्र में बढ़ती भूगर्भीय हलचलों का संकेत है। बता दें कि पिछले कुछ वर्षों में अलास्का, जापान और इंडोनेशिया जैसे क्षेत्रों में भी शक्तिशाली भूकंप दर्ज किए गए हैं, जिससे वैश्विक सतर्कता की आवश्यकता बढ़ गई है।

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