नेशनल डेस्क: समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को घोषणा की कि उनकी पार्टी 26 जुलाई को आरक्षण दिवस और संविधान सम्मान दिवस के रूप में मनाएगी। इस मौके पर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर संविधान और समाजवाद के खिलाफ होने का आरोप भी लगाया।
अखिलेश यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “हमने तय किया है कि 26 जुलाई को हम आरक्षण दिवस और संविधान सम्मान दिवस मनाएंगे।” उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी को संविधान से कोई सच्ची निष्ठा नहीं है और वे समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के खिलाफ काम कर रहे हैं।
भाजपा पर हमला
अखिलेश ने आरोप लगाया कि भा.ज.पा. सत्ता में आने के बाद संविधान के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करती। उन्होंने कहा, “भाजपा संविधान का नाम लेकर सत्ता में आती है, लेकिन सत्ता में आने के बाद वे बाबा साहब के रास्ते पर नहीं चलते। उनका शपथ ग्रहण समारोह भी दिखाता है कि उनकी संविधान के प्रति कोई सच्ची निष्ठा नहीं है। ये लोग समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ हैं।”
समाजवादियों का विरोध
अखिलेश ने आगे कहा, “समाज में एक पुराना संघर्ष है, ‘मैं बनाम हम’ की लड़ाई। जो लोग अपने स्वार्थ के लिए यह लड़ाई लड़ते हैं, उनका समाज से कोई वास्ता नहीं है। ऐसे लोग समाज का भला नहीं कर सकते।” उन्होंने यह भी कहा कि भा.ज.पा. के लोग समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता के विरोधी हैं, और उन्हें इन विचारों का विरोध करने के लिए बड़ा दिल चाहिए, जो उनके पास नहीं है।
पीडीए और सकारात्मक राजनीति
सपा प्रमुख ने प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन (पीडीए) की सराहना करते हुए कहा कि यह गठबंधन सकारात्मक राजनीति की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों का समाज में वर्चस्व है, वे हमेशा गरीबों और कमजोरों पर अत्याचार करते हैं और पीडीए जैसे गठबंधन को स्वीकार नहीं कर सकते। अखिलेश ने कहा, “जो लोग संविधान और आरक्षण के खिलाफ हैं, वे अप्रत्यक्ष रूप से समाजवादियों और धर्मनिरपेक्ष लोगों के खिलाफ भी बोलते हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि अगर वे सीधे संविधान और आरक्षण के खिलाफ बोलेंगे, तो उनका वोट बैंक खिसक सकता है।”
इटावा की घटना पर प्रतिक्रिया
इटावा में एक कथावाचक के खिलाफ दर्ज मुकदमे पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा, “भाजपा के लोग महाकुंभ में झूठ बोल सकते हैं और आंकड़े छिपा सकते हैं। अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इटावा की घटना के बारे में पता चलता, तो वे भारत सरकार के नेताओं को डांट सकते थे।” उन्होंने कहा, “आप दुनिया को दिखाना चाहते हो कि आप विश्वगुरु बन गए हैं, लेकिन जब आपके लोग ऐसे काम करेंगे तो दूसरों से आलोचना ही मिलेगी।” इस तरह, अखिलेश यादव ने भाजपा पर कई गंभीर आरोप लगाए और समाजवादी विचारधारा की रक्षा के लिए अपनी पार्टी के द्वारा उठाए गए कदमों की व्याख्या की।

