
नेशनल डेस्क : दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अगुवाई वाली दिल्ली सरकार ने मंगलवार को दिल्ली स्कूल फीस एक्ट को मंज़ूरी दे दी है। इस कदम से हजारों अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, क्योंकि यह कदम दिल्ली के निजी स्कूलों में फीस बढ़ोतरी को नियंत्रित करने में मदद करेगा। लंबे समय से स्कूलों द्वारा फीस में अनियंत्रित वृद्धि को लेकर अभिभावक परेशान थे, और यह निर्णय उनके लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…
फीस में मनमानी पर सरकार की कार्रवाई…
आपको बता दें कि दिल्ली में कई सालों से निजी स्कूलों द्वारा फीस में मनमानी वृद्धि की जा रही थी, जिससे माता-पिता और अभिभावकों में असंतोष फैल गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले तीन सालों में 42 प्रतिशत पेरेंट्स ने स्वीकार किया कि स्कूल फीस 50 से 80 प्रतिशत तक बढ़ा दी गई है। इस बढ़ोतरी से अभिभावकों की परेशानियों में इजाफा हुआ है, और अब दिल्ली सरकार ने इस पर कड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली स्कूल फीस एक्ट को लागू करने का निर्णय लिया है।
#WATCH दिल्ली: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, “…दिल्ली में ये बड़ी स्थिति रही कि पिछली सरकारों ने कभी भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया कि दिल्ली में फीस न बढ़े। 1973 के दिल्ली स्कूल एक्ट में फीस को लेकर एक सेक्शन 17(3) जिसमें ऐसी कोई गाइड लाइन नहीं थी कि प्राइवेट स्कूलों की फीस न… pic.twitter.com/AO4FtLSBIg
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 29, 2025
फीस वृद्धि को लेकर प्रदर्शन
हालांकि, इस फैसले से पहले, दिल्ली शिक्षा निदेशालय के बाहर अभिभावकों ने विरोध प्रदर्शन भी किया था। यह विरोध प्रदर्शन निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों द्वारा ‘अनियमित और अत्यधिक’ फीस बढ़ाने के खिलाफ था। माता-पिता और अभिभावक लगातार शिकायत कर रहे थे कि स्कूलों की फीस में वृद्धि का कोई स्पष्ट कारण नहीं है और यह बच्चों के शिक्षा के अधिकार को प्रभावित कर रहा है।
भाजपा और CM रेखा गुप्ता पर हमला
दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता आतिशी ने भाजपा पर हमला करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से चुनौती दी थी कि वे सभी निजी स्कूलों में फीस वृद्धि को तुरंत रोकने का आदेश दें। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया और अब जब सरकार ने एक्ट को मंजूरी दी है, तब इसे लागू करने में देरी नहीं की जानी चाहिए। दिल्ली सरकार का यह कदम अभिभावकों के लिए राहत की बात है, क्योंकि यह स्कूल फीस में अनियंत्रित वृद्धि को नियंत्रित करने की दिशा में एक ठोस कदम हो सकता है। यह एक्ट निजी स्कूलों में फीस वृद्धि को पारदर्शी और नियंत्रित तरीके से लागू करेगा, जिससे अभिभावकों की वित्तीय समस्याओं में कमी आएगी।
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