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‘मौन व्रत, मौन व्रत…’, ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा से शशि थरूर बाहर; कांग्रेस से बढ़ती दूरी पर उठे सवाल

नेशनल डेस्क: संसद में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर हो रही अहम चर्चा से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने खुद को अलग कर लिया है। जब उनसे पूछा गया कि वह इस चर्चा में कांग्रेस की ओर से क्यों नहीं बोल रहे हैं, तो उन्होंने मुस्कराते हुए सिर्फ इतना कहा, मौन व्रत… मौन व्रत। इस हल्के जवाब के बाद राजनीतिक हलकों में एक बार फिर थरूर और कांग्रेस नेतृत्व के बीच तनाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

किस पर हो रही है चर्चा?

‘ऑपरेशन सिंदूर’ उस जवाबी सैन्य कार्रवाई का नाम है, जो भारत ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान और पीओके में आतंकवादी ठिकानों पर की थी। इसमें जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के ठिकानों को सटीक मिसाइल हमलों से तबाह किया गया था।

थरूर को बोलने से किसने रोका?

कांग्रेस के आधिकारिक वक्ताओं में राहुल गांधी, गौरव गोगोई, प्रियंका गांधी, दीपेंद्र हुड्डा, मणिकम टैगोर और अन्य का नाम है, लेकिन थरूर का नाम नहीं है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि थरूर ने स्वेच्छा से खुद को चर्चा से अलग किया। लेकिन यह भी चर्चा है कि पार्टी ने उन्हें मंच पर नहीं बुलाया, जिससे उनके और पार्टी के बीच तनाव की पुष्टि होती है।

थरूर और पार्टी के रिश्तों में खटास

कुछ हफ्ते पहले थरूर भारत की ओर से विदेश दौरे पर गए थे, जहां उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर भारत का पक्ष रखा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार ने चार नाम पार्टी से मांगे थे, लेकिन सरकार ने अपनी मर्जी से थरूर और सलमान खुर्शीद को भेज दिया। इससे कांग्रेस खफा हो गई, क्योंकि उसने जिन नेताओं के नाम दिए थे उन्हें नजरअंदाज किया गया। खरगे का इशारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक बयान में बिना नाम लिए कहा था कि कुछ लोगों के लिए मोदी पहले हैं, देश बाद में। यह टिप्पणी थरूर की सरकार से नज़दीकी के संकेत के रूप में देखी गई।

क्या कहता है थरूर का ‘मौन व्रत’?

जब पत्रकारों ने पूछा कि आप चर्चा में क्यों नहीं हैं, तो थरूर ने बस मुस्कुराकर दो शब्द कहे- मौन व्रत, मौन व्रत…। यह जवाब साफ संकेत देता है कि वह फिलहाल पार्टी के रुख से असहमत हैं, लेकिन खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं। शशि थरूर का संसद में चुप रहना सिर्फ एक व्यक्ति की चुप्पी नहीं, बल्कि यह कांग्रेस के भीतर जारी अंतर्कलह और नेतृत्व से असहमति का संकेत हो सकता है। आने वाले समय में अगर थरूर और कांग्रेस के बीच दूरियाँ और बढ़ती हैं, तो यह राजनीतिक परिदृश्य पर बड़ा असर डाल सकती हैं।

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