नेशनल डेस्क : पिछले साल 5 अगस्त को हुए हिंसक आंदोलन के बाद बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इस आंदोलन के दौरान हिंसा ने देश में गहरा संकट पैदा कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप हसीना को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद, शेख हसीना भारत में शरण लेने के लिए चली आई थी। वहीं अब शेख हसीना ने उन पुलिसकर्मियों की विधवाओं से वर्चुअल संवाद किया जिनके पति प्रदर्शनकारियों के हमलों में शहीद हो गए थे। अपने बयान में, शेख हसीना ने यूनुस सरकार को आतंकवादी समर्थक करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस सरकार ने बांग्लादेश को आतंकवादियों का सहारा दिया है और देश में अराजकता का माहौल पैदा किया है।
पीड़ित परिवारों के लिए मदद का वादा
आपको बता दें कि इस संवाद में शेख हसीना ने यह भी वादा किया कि शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों की हर संभव मदद की जाएगी। साथ ही, जिन लोगों ने इन पुलिसकर्मियों की हत्या की, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शेख हसीना ने सिराजगंज में हुए छात्र आंदोलन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों का जिक्र किया। इस हिंसा में कई पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। हसीना ने इस घटना पर कहा, “मैं इस दर्दनाक घटना का बदला लूंगी और हमारे पुलिसकर्मियों की मौतों का प्रतिशोध लूंगी।” उन्होंने यह भी कहा कि यूनुस की अंतरिम सरकार में एक छात्र नेता यह मानता है कि पुलिसकर्मियों की हत्या किए बिना कोई क्रांति नहीं होती। शेख हसीना ने इस स्थिति को अराजकता करार देते हुए इसे खत्म करने का संकल्प लिया।
कानून का सामना करेंगे दोषी…
शेख हसीना ने अपनी जान को खतरे में डालने वाले हमलों का जिक्र करते हुए कहा, “अल्लाह ने मुझे दूसरी जिंदगी दी है, और मैं मानती हूं कि यह किसी उद्देश्य के लिए है।” उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग बांग्लादेश को आतंकी राज्य बनाने में लगे हुए हैं और जिनकी वजह से मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, वे एक दिन कानून का सामना करेंगे।
बांग्लादेश में बिगड़ती स्थिति
शेख हसीना ने हाल ही में बांग्लादेश की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि पिछले छह महीनों से हिंसा लगातार जारी है। उन्होंने बताया कि अब यह खबर आ रही है कि इस हिंसा को नियंत्रित करने के लिए “ऑपरेशन डेविल हंट” शुरू किया जाएगा। शेख हसीना ने वर्तमान सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह देश को ठीक से चला पाने में असमर्थ है। बांग्लादेश की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है, और सरकार के पास इस संकट से उबरने का कोई ठोस उपाय नहीं है। पूर्व प्रधानमंत्री ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था संकट में है। साथ ही, उन्होंने कानून व्यवस्था की स्थिति को भी खतरनाक बताया। सार्वजनिक सुरक्षा भी एक बड़े खतरे में है, और देश की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।

