नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी ने गाजा में युद्धविराम की मांग को लेकर संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में लाए गए प्रस्ताव पर भारत के वोटिंग से दूर रहने को लेकर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की है। इस प्रस्ताव के पक्ष में 149 देशों ने वोट दिया, जबकि भारत उन 19 देशों में शामिल था, जिन्होंने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।
कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि भारत की विदेश नीति अब नैतिक मूल्यों से भटक गई है और यह गुटनिरपेक्षता, शांति और न्याय जैसे सिद्धांतों से एक खतरनाक बदलाव है। खरगे ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी को बार-बार की गई इन विदेश नीति की गलतियों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। भारत ने वोटिंग से दूर रहकर खुद को लगभग अलग-थलग कर लिया है।”
प्रियंका गांधी का बयान
प्रियंका गांधी वाड्रा ने भारत की चुप्पी को “शर्मनाक और दुखद” बताया। उन्होंने कहा, “हम सिर्फ चुप ही नहीं हैं जब इजराइल गाजा को तबाह कर रहा है, बल्कि हम तब भी शांत हैं जब वह ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन कर वहां की सरकार के खिलाफ हमले कर रहा है। यह हमारी उपनिवेश-विरोधी और न्यायप्रिय परंपरा से पूरी तरह उलट है।”
केसी वेणुगोपाल का सवाल
कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने पूछा कि भारत, ब्रिक्स और एससीओ जैसे समूहों में अकेला देश क्यों रहा जिसने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। वेणुगोपाल ने कहा, “ऐसा क्या बदल गया कि छह महीने पहले जो देश गाज़ा में शांति की बात कर रहा था, अब चुप है? क्या सरकार अटल जी की फिलिस्तीन नीति भी छोड़ चुकी है?”
भारत का जवाब क्या है?
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि भारत की यह स्थिति पहले जैसे ही है और उसने बातचीत व कूटनीति के रास्ते को अपनाने का फैसला किया है। भारत ने न तो प्रस्ताव का समर्थन किया और न ही विरोध किया, लेकिन वोटिंग में शामिल नहीं हुआ। अमेरिका, इज़राइल और 10 अन्य देशों ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया, जबकि ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे अमेरिकी सहयोगी देशों ने प्रस्ताव का समर्थन किया।
क्या था संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव?
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने गाज़ा में तुरंत और स्थायी युद्धविराम की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पेश किया। यह प्रस्ताव मानवीय संकट को रोकने के लिए लाया गया था, ताकि हिंसा रोकी जा सके और लोगों की जान बचाई जा सके।