नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार को एक चिट्ठी लिखकर राज्य में चल रही वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह पूरी प्रक्रिया बिना तैयारी के चलाई जा रही है, जिससे अधिकारियों, खासकर बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs), और आम लोगों पर भारी दबाव पड़ रहा है।
क्या है ममता बनर्जी की मुख्य बातें?
ट्रेनिंग और तैयारी की भारी कमी
ममता बनर्जी का कहना है कि BLOs को इस काम के लिए ठीक से ट्रेनिंग नहीं दी गई। ऑनलाइन डेटा एंट्री के लिए सॉफ्टवेयर भी बार-बार फेल हो रहा है, जिससे गलत डेटा भरने का खतरा बढ़ गया है।
BLOs पर असहनीय दबाव
उन्होंने कहा कि कई BLOs शिक्षक और फ्रंटलाइन वर्कर भी हैं, जिन्हें अपनी रोज़ की ड्यूटी के साथ-साथ घर-घर सर्वे और ऑनलाइन फॉर्म सबमिशन करना पड़ रहा है। काम इतना बढ़ गया है कि कई BLOs “इंसानी सीमा से ज़्यादा” मेहनत कर रहे हैं। गलती होने पर उन पर नोटिस और अनुशासनात्मक कार्रवाई की धमकी दी जा रही है।
वोटर लिस्ट की सटीकता पर खतरा
ममता बनर्जी ने चेतावनी दी कि इतनी जल्दी-जल्दी और दबाव में काम कराने से गलतियां बढ़ेंगी। असली वोटरों के नाम कट सकते हैं। वोटर लिस्ट की विश्वसनीयता भी खतरे में पड़ेगी।
किसानों और मजदूरों के लिए गलत समय
उन्होंने बताया कि अभी पश्चिम बंगाल में धान की कटाई का पीक समय है और रबी फसलों की बुआई चल रही है। ऐसे समय किसानों और मजदूरों के लिए SIR प्रक्रिया में हिस्सा लेना मुश्किल है।
दबाव के कारण दुखद घटनाएं
ममता ने दावा किया कि जलपाईगुड़ी जिले में SIR के अत्यधिक दबाव की वजह से एक आंगनवाड़ी वर्कर, जो BLO के रूप में काम कर रही थीं, ने आत्महत्या कर ली। उन्होंने कहा कि ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं।
EC पर धमकाने का आरोप
मुख्यमंत्री ने कहा कि मदद या समय बढ़ाने के बजाय चुनाव आयोग की राज्य शाखा BLOs को धमका रही है, नोटिस दे रही है, जिससे माहौल डर और तनाव भरा हो गया है।
4 दिसंबर तक काम पूरा होना मुश्किल
उनके मुताबिक, इस रफ़्तार में सही और सटीक वोटर डेटा 4 दिसंबर की समय सीमा तक अपलोड कर पाना लगभग नामुमकिन है।
मुख्यमंत्री की मांग
ममता बनर्जी ने CEC से अपील की कि SIR प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए, BLOs को सही ट्रेनिंग और सपोर्ट दिया जाए, समय सीमा दोबारा तय की जाए, और पूरे सिस्टम की खामियों की समीक्षा कर इसे सुरक्षित और विश्वसनीय बनाया जाए। उनका कहना है कि अगर अब भी सुधार नहीं किया गया तो इससे चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।
मेष: दिन शुभ रहेगा...