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Electricity Theft Case : बिजली चोरी केस में SP सांसद बर्क को HC से बड़ी राहत, लेकिन जमा करने होंगे इतने रुपए

नेशनल डेस्क : उत्तर प्रदेश के संभल जिले में समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद जियाउर्रहमान बर्क के घर पर 1.91 करोड़ रुपये का बकाया बिजली बिल था, जिस पर अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अस्थायी रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है कि अगर सांसद दो हफ्तों के अंदर 6 लाख रुपये जमा कर देते हैं, तो उनका बिजली कनेक्शन फिर से जोड़ दिया जाए। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…

अगली सुनवाई 2 जुलाई को

दरअसल, इस मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच, जिसमें न्यायमूर्ति एसडी सिंह और न्यायमूर्ति संदीप जैन शामिल हैं, ने की। यह आदेश सांसद बर्क द्वारा दायर याचिका पर दिया गया है। कोर्ट ने बिजली विभाग को 3 सप्ताह का समय देते हुए कहा है कि वे पूरी जानकारी जुटाएं। अब इस केस की अगली सुनवाई 2 जुलाई 2025 को होगी।

सांसद के वकील की दलील

सांसद जियाउर्रहमान बर्क के वकील विधान चंद्र राय का कहना है कि जो बकाया बिल जोड़ा गया है वह 4,138 दिन पुराना है। जबकि कानून के अनुसार, बिजली विभाग केवल 335 दिन तक का ही बिल जोड़ सकता है। यानी विभाग ने नियमों का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग के अधिकारियों ने गलत तरीके से असेसमेंट किया है, जो कानूनी रूप से सही नहीं है।

कब और कैसे कटा था बिजली कनेक्शन ?

बिजली विभाग ने 19 दिसंबर 2024 को सुबह 7:30 बजे सपा सांसद के घर की बिजली काट दी थी। विभाग के एसडीओ संतोष त्रिपाठी उस दिन जांच करने पहुंचे थे। उनके अनुसार, सांसद के घर पर दो बिजली कनेक्शन थे एक खुद जियाउर्रहमान बर्क के नाम पर और दूसरा उनके दादा के नाम पर। हाल ही में उनके घर पर स्मार्ट मीटर लगाए गए थे, लेकिन पिछले 6 महीनों से जीरो यूनिट खपत दिख रही थी, जो संदिग्ध था। इसलिए जांच की गई।

बिजली चोरी का आरोप और FIR

जांच में यह सामने आया कि सांसद के घर पर असल में 16 किलोवॉट बिजली का उपयोग हो रहा था, लेकिन मीटर में यह दर्ज नहीं हो रहा था। एमआरआई टेस्ट (Meter Reading Instrument टेस्ट) में दोनों मीटरों में छेड़छाड़ के सबूत मिले। इस पर बिजली विभाग ने सांसद के खिलाफ बिजली चोरी का मामला दर्ज कराया और FIR दर्ज की गई।

फिलहाल राहत, लेकिन मामला लंबित

सपा सांसद को हाईकोर्ट से फिलहाल राहत मिल गई है, लेकिन मामला अभी अदालत में विचाराधीन है। अगली सुनवाई में तय होगा कि बिजली विभाग का असेसमेंट कितना वैध है और क्या बिजली चोरी का आरोप सही साबित होता है या नहीं।

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