Site icon Dainik Savera Times

रविवार के दिन जरूर करें सूर्यदेव के ये विशेष उपाय, दूर होगी आर्थिक तंगी और बढ़ेगा धन-वैभव

Special Remedies of Sun God : हिंदू धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी या देवता को समर्पित माना गया है। इन्हीं में से रविवार का दिन सूर्यदेव को समर्पित होता है। मान्यता है कि रविवार के दिन प्रातःकाल उठकर सूर्य को जल चढ़ाने से न केवल स्वास्थ्य लाभ होता है, बल्कि जीवन से नकारात्मक ऊर्जा भी दूर होती है और आर्थिक स्थिति में सुधार आता है।

यदि आप लंबे समय से आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं या धन से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तो रविवार को कुछ विशेष उपाय अपनाकर आप इन समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ प्रभावशाली उपाय… 

1. आर्थिक तंगी से मुक्ति पाने के लिए सूर्य पूजा

अगर घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं चल रही है, तो रविवार को सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके सूर्यदेव की पूजा करें।

विधि:

– एक तांबे के लोटे में साफ जल भरें।
– उसमें लाल फूल, अक्षत, रोली और गुड़ मिलाएं।
– पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य को अर्घ्य दें।
– साथ ही “ॐ आदित्य नमः” मंत्र का जाप करें।

यह उपाय लगातार हर रविवार करने से सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं और घर की आर्थिक परेशानियों का अंत होने लगता है।

2. धन-वैभव के लिए मछलियों को खिलाएं आटे की गोलियां

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, रविवार को सूर्य को जल चढ़ाने के बाद शाम के समय मछलियों को आटे की गोलियां खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

विधि:

– घर पर गेहूं के आटे की छोटी-छोटी गोलियां बनाएं।
– इन्हें लेकर किसी तालाब या नदी के किनारे जाएं।
– वहां मछलियों को ये गोलियां खिलाएं।

यह उपाय मां लक्ष्मी को प्रसन्न करता है और पैसों की तंगी से छुटकारा दिलाने में मदद करता है।

3. रविवार के मंत्र जाप से मिलेगी शुभता

सूर्य को जल अर्पित करते समय नीचे दिए गए मंत्रों का जाप करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मनचाही सफलता की प्राप्ति होती है:

ॐ घृणि सूर्याय नमः
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा:
ॐ आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्न: सूर्य: प्रचोदयात:
ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:
जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महद्युतिं। तमोरिसर्व पापघ्नं प्रणतोस्मि दिवाकरम:

Exit mobile version