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‘आत्मसमर्पण ही एकमात्र रास्ता, वरना अंजाम भुगतने होंगे’, माओवादी कमांडर हिडमा के खात्मे पर बोले IG सुंदरराज

नेशनल डेस्क: मंगलवार को सुरक्षा बलों ने देश के सबसे वांछित माओवादी नेताओं में से एक माडवी हिडमा को मुठभेड़ में मार गिराया। इस सफलता को बस्तर आईजी पी. सुंदरराज ने सुरक्षा बलों के लिए एक “बड़ी और निर्णायक जीत” बताया। हिडमा को ढेर करने के बाद सुंदरराज ने कहा कि आत्मसमर्पण ही एकमात्र रास्ता, वरना अंजाम भुगतने होंगे।

आत्मसमर्पण के अलावा कोई रास्ता नहीं

आईजी सुंदरराज ने कहा कि हिडमा का मारा जाना न केवल बस्तर या दंडकारण्य क्षेत्र के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक अहम उपलब्धि है। उन्होंने कहा, “माओवादी अब चाहे जमीन में छिपें या कहीं भी भागें, उनके पास केवल आत्मसमर्पण करके मुख्यधारा में शामिल होने का ही विकल्प बचा है। नहीं तो उन्हें इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।” उन्होंने बताया कि हाल के महीनों में कई बड़े माओवादी नेताओं के मारे जाने से संगठनों में घबराहट है, और कई कार्यकर्ता अन्य जगहों पर भाग रहे हैं।

कुख्यात उग्रवादी हिडमा ढेर, 26 हमलों का मास्टरमाइंड

43 वर्षीय हिडमा पर सुरक्षा बलों और नागरिकों पर कम से कम 26 बड़े हमलों में शामिल होने के आरोप थे। इनमें सबसे कुख्यात हमलों में जिनमें 2017 का सुकमा हमला, इसमें 26 CRPF जवान शहीद हुए। 2010 का दंतेवाड़ा हमला, जिसमें 76 जवान शहीद हुए। हिडमा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सदस्य था और पीएलजीए बटालियन-1 का कमांडर भी। यह माओवादियों की सबसे खतरनाक स्ट्राइक यूनिट मानी जाती है। उसके सिर पर 50 लाख रुपये का इनाम था।

मुठभेड़ में हिडमा, उसकी पत्नी और अन्य माओवादी ढेर

सूत्रों के मुताबिक, हिडमा के साथ उसकी पत्नी राजे, और माओवादी संगठन के सदस्य चेल्लूरी नारायण तथा टेक शंकर, सहित कुल 6 माओवादी मारे गए। आईजी सुंदरराज ने बताया कि मुठभेड़ के बाद मौके से 47 एके राइफलें, गोला-बारूद और अन्य हथियार बरामद किए गए हैं।

अमित शाह ने की वरिष्ठ अधिकारियों से बात

मुठभेड़ की जानकारी मिलने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उच्च अधिकारियों से बात की। बताया जा रहा है कि सुरक्षा बलों ने हिडमा को पकड़ने या मार गिराने की तय 30 नवंबर की समय सीमा से पहले ही यह अभियान सफल कर लिया।

कौन था माडवी हिडमा?

जन्म: 1981, सुकमा ज़िले के पुरवती गांव
पद: पीएलजीए बटालियन-1 का प्रमुख
पहचान: बस्तर क्षेत्र से केंद्रीय समिति में शामिल होने वाला एकमात्र आदिवासी नेता
इनाम: 50 लाख रुपये
छवि: माओवादियों के “सबसे खतरनाक और रणनीतिक कमांडर” के रूप में पहचाना जाता था

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