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न बर्फ गिरी, न छुट्टियां, फिर भी रोहतांग पास में लगा भारी जाम; वायरल Video ने खड़े किए कई सवाल

There massive traffic jam at Rohtang Pass

There massive traffic jam at Rohtang Pass

हिमाचल डेस्क: हिमाचल प्रदेश का मशहूर रोहतांग पास आमतौर पर बर्फबारी या टूरिस्ट सीजन में ट्रैफिक जाम के लिए जाना जाता है। लेकिन इस बार हैरानी की बात यह है कि न तो बर्फ गिरी है और न ही कोई बड़ी छुट्टियां चल रही हैं, फिर भी यहां गाड़ियों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।

सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो ने सभी का ध्यान खींचा है। इस वीडियो में पहाड़ों की संकरी सड़क पर गाड़ियां रेंगती नजर आ रही हैं और ट्रैफिक पूरी तरह से रुका हुआ है। लोग सोच में पड़ गए हैं कि आखिर इतनी भीड़ अचानक क्यों उमड़ पड़ी?

वायरल वीडियो में क्या दिखा?

यह वीडियो एक्स (X) यूजर निखिल सैनी ने शेयर किया है। क्लिप में साफ देखा जा सकता है कि रोहतांग पास की सड़क पर दूर-दूर तक कारें खड़ी हैं। न बर्फ है, न मौसम बेहद ठंडा है, फिर भी ट्रैफिक किसी पीक सीजन जैसा लग रहा है।

 

यूजर ने क्या लिखा?

वीडियो के साथ निखिल सैनी ने लिखा, “क्या लोग जहरीली AQI से बचने आए हैं या कोई और वजह है? ये किसी शहर की सड़क नहीं, रोहतांग पास है। न बर्फ गिरी है, न छुट्टियां हैं, फिर भी इतना ट्रैफिक!” उनका यह सवाल अब सोशल मीडिया पर हजारों लोगों की आवाज बन गया है।

क्या दिल्ली की खराब हवा वजह है?

माना जा रहा है कि इस भीड़ की एक बड़ी वजह दिल्ली की बिगड़ती एयर क्वालिटी हो सकती है। मंगलवार को दिल्ली का AQI 380 तक पहुंच गया, जो ‘Very Poor’ कैटेगरी में आता है। स्मॉग की वजह से सांस लेना तक मुश्किल हो गया। बुधवार को AQI थोड़ा सुधरा, लेकिन फिर भी 329 पर ‘Very Poor’ बना रहा। ऐसे में माना जा रहा है कि साफ हवा की तलाश में लोग पहाड़ों की ओर निकल पड़े हैं।

पहाड़ों पर बढ़ता दबाव

इस वीडियो के सामने आते ही ओवरटूरिज्म को लेकर चिंता फिर से बढ़ गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं, क्या सोशल मीडिया रील्स बिना प्लान के लोगों को पहाड़ों की तरफ खींच रही हैं? क्या इको-सेंसिटिव इलाकों में भीड़ को कंट्रोल करने की कोई ठोस व्यवस्था है?

सिर्फ जाम नहीं, एक चेतावनी

रोहतांग पास का यह नजारा सिर्फ ट्रैफिक जाम की कहानी नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण, प्रदूषण और अनियंत्रित टूरिज्म पर एक बड़ी चेतावनी है। अगर समय रहते संतुलन नहीं बनाया गया, तो सुकून की तलाश में लोग खुद ही प्रकृति को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

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