Coach David Trist passes away : न्यूजीलैंड क्रिकेट ने गुरुवार को एक दुखद समाचार साझा करते हुए बताया कि पूर्व ब्लैककैप्स कोच और कैंटरबरी के पूर्व तेज गेंदबाज डेविड ट्रिस्ट का निधन हो गया है। वह 77 वर्ष के थे। ट्रिस्ट का निधन क्राइस्टचर्च में हुआ, और न्यूजीलैंड क्रिकेट ने इस महान खिलाड़ी और कोच के परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है।
NZC is deeply saddened to confirm the passing of former BLACKCAPS coach David Trist, who died in Christchurch yesterday, aged 77.
A former Canterbury and New Zealand pace bowler, David coached the BLACKCAPS from 1999 to 2001, during which time they won the ICC Champions Trophy… pic.twitter.com/B9qvO21Y5Q
— BLACKCAPS (@BLACKCAPS) May 29, 2025
डेविड ट्रिस्ट का क्रिकेट करियर… एक उज्जवल और प्रभावशाली यात्रा
डेविड ट्रिस्ट का क्रिकेट जीवन हमेशा याद किया जाएगा। ट्रिस्ट ने 1999 से 2001 तक न्यूजीलैंड की पुरुष टीम को कोचिंग दी और उनकी कोचिंग में न्यूजीलैंड ने 2000 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर वैश्विक क्रिकेट में अपना नाम स्थापित किया। यह टूर्नामेंट न्यूजीलैंड के लिए एक ऐतिहासिक क्षण साबित हुआ, क्योंकि यह उनका एकमात्र वैश्विक व्हाइट बॉल खिताब था।
नैरोबी में खेले गए फाइनल में, न्यूजीलैंड ने भारत को चार विकेट से हराया, जिसमें क्रिस केर्न्स का नाबाद शतक निर्णायक साबित हुआ। ट्रिस्ट की कोचिंग में टीम ने अपनी समन्वय क्षमता और रणनीतिक समझ को दिखाया, जिससे उनकी कोचिंग के प्रभाव को स्पष्ट किया गया।
कैंटरबरी और न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज के रूप में करियर
ट्रिस्ट का खेल जीवन भी उतना ही प्रभावशाली था। वह एक तेज गेंदबाज के रूप में कैंटरबरी के प्रमुख सदस्य थे और 1968 से 1982 तक 14 वर्षों तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेले। उन्होंने 24 प्रथम श्रेणी मैचों और छह लिस्ट ए मैचों में हिस्सा लिया, जिसमें उन्होंने 57 विकेट भी हासिल किए। उनका सबसे यादगार पल 1972 में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर विक्टोरिया के खिलाफ न्यूजीलैंड के लिए खेलना था।
कोचिंग करियर में अंतरराष्ट्रीय सफलता
न्यूजीलैंड क्रिकेट से अपनी भूमिका छोड़ने के बाद, ट्रिस्ट ने ओल्ड कॉलेजियंस क्रिकेट क्लब (क्राइस्टचर्च) में कोचिंग डायरेक्टर के रूप में काम किया। इसके साथ ही उन्होंने भारत, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका, नीदरलैंड और हांगकांग में भी कोचिंग के अवसरों का लाभ उठाया।
उन्होंने 1989 में दक्षिण अफ्रीका के ईस्टर्न प्रोविंस को खिताब दिलवाया और नीदरलैंड को कोचिंग दी, जिससे उनकी कोचिंग क्षमता और भी अधिक परिपक्व हुई। न्यूजीलैंड लौटने के बाद उन्होंने कैंटरबरी और ऑकलैंड को कोचिंग दी, जहां भी उन्होंने अपनी टीमों को सफलता दिलाई।
ट्रिस्ट की विरासत: एक प्रेरणा
डेविड ट्रिस्ट ने न केवल एक कोच के रूप में, बल्कि एक खिलाड़ी के रूप में भी क्रिकेट की दुनिया में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनकी कोचिंग शैली और उनके द्वारा दिया गया मार्गदर्शन हमेशा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उनके निधन के साथ ही न्यूजीलैंड क्रिकेट ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसने देश के क्रिकेट को नई दिशा दी और वैश्विक मंच पर उसे सम्मान दिलाया।
न्यूजीलैंड क्रिकेट ने एक बयान में कहा, “हम डेविड ट्रिस्ट के निधन की खबर से गहरे शोक में हैं। वह न केवल एक महान कोच और खिलाड़ी थे, बल्कि एक प्रेरक नेतृत्वकर्ता भी थे। हम उनके परिवार और दोस्तों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं।”
डेविड ट्रिस्ट की क्रिकेट यात्रा, उनकी कोचिंग क्षमता और उनके द्वारा की गई कड़ी मेहनत हमेशा याद रखी जाएगी, और उनका योगदान न्यूजीलैंड क्रिकेट में अमिट रहेगा।

