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Unnao rape case: SC से कुलदीप सेंगर को झटका, उम्रकैद की सजा सस्पेंड करने के फैसले पर लगाई रोक

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नई दिल्ली: उन्नाव रेप केस में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लेते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें दोषी कुलदीप सेंगर की उम्रकैद की सजा सस्पेंड कर उसे जमानत देने की इजाजत दी गई थी। उच्चतम न्यायालय ने साफ कहा कि सेंगर को जेल से रिहा नहीं किया जाएगा। यह फैसला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की वेकेशन बेंच ने लिया। बेंच में जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एजी. मसीह भी शामिल थे। यह सुनवाई सीबीआई की उस याचिका पर हुई, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुलदीप सेंगर एक और मामले में भी दोषी है। उसे IPC की धारा 304 (हत्या) के तहत सज़ा मिल चुकी है और वह उस केस में अभी भी जेल में बंद है। इन “अजीब हालात” को देखते हुए कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर तुरंत रोक लगा दी। कोर्ट ने सेंगर को नोटिस जारी किया है और CBI की याचिका पर दो हफ्ते के अंदर जवाब देने को कहा है। तब तक सेंगर जेल में ही रहेगा।

पीड़ित पक्ष की प्रतिक्रिया:

पीड़िता की ओर से वकील हेमंत कुमार मौर्य ने सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने साफ आदेश दिया है कि आरोपी को किसी भी हालत में जेल से रिहा नहीं किया जाएगा। जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर रोक रहेगी।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया:

कांग्रेस नेता और महिला अधिकार कार्यकर्ता मुमताज पटेल ने कहा कि अब उम्मीद है कि पीड़िता को न्याय मिलेगा। उन्होंने रेप के मामलों में कड़ी सज़ा और नए कानून की मांग की।

पूरा मामला क्या है?

दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 दिसंबर को कुलदीप सेंगर की उम्रकैद की सज़ा अपील लंबित रहने तक सस्पेंड कर दी थी और उसे ज़मानत दे दी थी। कुलदीप सेंगर को दिसंबर 2019 में उन्नाव रेप केस में दोषी ठहराया गया था और उम्रकैद के साथ 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। हालांकि इस केस में उसे ज़मानत मिल गई थी, लेकिन वह एक अन्य CBI केस (हत्या से जुड़ा) में 10 साल की सज़ा काट रहा था, इसलिए जेल में ही था।

पीड़िता की चिंता

पीड़िता ने कहा कि उसे सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलने का भरोसा है। उसने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सुरक्षा की मांग की ताकि वह बिना डर के अपनी कानूनी लड़ाई लड़ सके। पीड़िता का आरोप है कि सेंगर ने अधिकारियों को रिश्वत दी और ज़मानत मिलने के बाद उसके परिवार को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ा है। उसके पति की नौकरी चली गई है और बच्चों व गवाहों की सुरक्षा को लेकर खतरा बना हुआ है।

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