इंटरनेशनल डेस्क: दुनिया के 3 अहम देशों के बीच समझौता हुआ है। इन देशों में संयुक्त राज्य अमेरिका, एल साल्वाडोर और वेनेजुएला शामिल है। शुक्रवार को हुए अहम समझौते के तहत वेनेजुएला ने अपनी जेल से 10 अमेरिकी कैदियों को रिहा किया है। इसके बदले में अमेरिका ने वेनेजुएला के 250 से अधिक प्रवासियों को उनके देश वापस भेजा है। कुछ ही महीने पहले इन लोगों को एल साल्वाडोर भेजा गया था।
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने फैसले की पुष्टि की है। उन्होंने इस दिन को खुशी और आशीर्वाद का दिन बताया। मादुरो ने कहा कि वेनेजुएला के लिए यह एक ऐतिहासिक दिन है। साल्वाडोर में इन कैदियों को मार्च में एक बड़ी जेल में शिफ्ट किया गया था, जिसे CECOT कहा जाता है। इस जेल में खास तौर पर उन लोगों को रखा गया था, जिनको ट्रंप प्रशासन ने खतरनाक गिरोह का हिस्सा बताकर अमेरिका से निकाला था।
लोगों को यातना देने के आरोप
हालांकि उस समय इन लोगों के खिलाफ सबूत नहीं दिए गए थे। मानव अधिकार संगठन इस जेल को काफी खतरनाक मानते हैं, जहां कैदियों के साथ मारपीट और यातना के मामले अक्सर सामने आते हैं। कई कैदियों की मौत भी यहां हो चुकी है। वेनेजुएला के जिन लोगों को रिहा किया गया है, उनमें कई लोगों के शरीर पर मारपीट के निशान मिले हैं। एक शख्स का आरोप है कि यातना के चलते उसकी किडनी खत्म हो गई।
Venezuela releases jailed Americans in deal that also frees migrants deported to El Salvador by US https://t.co/oOHGtyoMig pic.twitter.com/V2mGIcvfuP
— The News-Herald (@NewsHeraldMI) July 19, 2025
वेनेजुएला ने फैसले का किया था विरोध
रिहा हुए अमेरिकी लोगों के परिवारों ने आरोप लगाया कि उन लोगों को राजनीतिक मोहरा बनाया गया था। कई महीनों से उनको अपने परिजनों के रिहा होने का इंतजार था। अब उनके लिए खुशी का दिन आया है। बता दें कि मामले में कुछ दिन पहले एल साल्वाडोर के राष्ट्रपति नायब बुकेले का बयान सामने आया था। उन्होंने कहा था कि वेनेजुएला को अपने प्रवासियों के बदले कुछ अमेरिकी कैदियों को रिहा करना चाहिए।
अब समझौता जरूर हुआ है, तब वेनेजुएला ने इस फैसले को फासीवादी सोच से प्रेरित बताया था। बता दें कि इस समझौते को तीनों देशों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। मामले को एल साल्वाडोर की कूटनीतिक सोच के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, अमेरिका और वेनेजुएला को अपने-अपने लोग वापस मिल चुके हैं। यह समझौता अंतरराष्ट्रीय तौर पर बड़ा कदम माना जा रहा है।

