नई दिल्ली: केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को साफ कहा कि संचार साथी ऐप को न तो इंस्टॉल करना ज़रूरी है और न ही एक्टिवेट करना। यह पूरी तरह से लोगों की मर्ज़ी पर निर्भर करता है। अगर कोई इसे रखना चाहे तो रख सकता है, और अगर न रखना चाहे तो इसे कभी भी डिलीट कर सकता है। सिंधिया ने कहा कि विपक्ष इसे बेवजह मुद्दा बना रहा है।
संसद के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए सिंधिया ने कहा, “अगर आप इसे एक्टिवेट करना चाहते हैं, तो करें। नहीं करना चाहते, तो मत करें। चाहें तो इसे डिलीट कर दें। यह पूरी तरह आपकी मर्जी है।” उन्होंने कहा कि विपक्ष ऐप को लेकर गलत जानकारी फैला रहा है, जबकि असलियत में संचार साथी एक कंज्यूमर-सेफ्टी ऐप है, जो लोगों को मोबाइल फ्रॉड से बचाने में मदद करता है। सिंधिया ने दावा किया कि इस ऐप और पोर्टल ने 2024 में करीब 22,800 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी होने से बचाई है।
सिंधिया ने बताया कि संचार साथी ऐप और वेबसाइट की मदद से यूजर किसी मोबाइल डिवाइस का IMEI नंबर असली है या नहीं, यह जांच सकते हैं। अपने नाम पर कितने मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड हैं, यह पता लगा सकते हैं। फर्जी या संदिग्ध मोबाइल कनेक्शन की शिकायत कर सकते हैं। चोरी या गुम हुए फोन की रिपोर्ट कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह ऐप जासूसी, कॉल मॉनिटरिंग या निगरानी के लिए नहीं है। इसमें ऐसी कोई सुविधा मौजूद नहीं है।
मंत्री के अनुसार संचार साथी पोर्टल के 20 करोड़ उपयोगकर्ता। मोबाइल ऐप को 1.5 करोड़ से ज्यादा डाउनलोड। 2.25 करोड़ फर्जी या संदिग्ध मोबाइल कनेक्शन डीएक्टिवेट। 20 लाख चोरी हुए फोन का पता। 7.5 लाख फोन अपने असली मालिकों को लौटाए जा चुके हैं।
डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) ने मोबाइल कंपनियों और इंपोर्टर्स को निर्देश दिया है कि नए मोबाइल फोन्स में यह ऐप पहले से इंस्टॉल हो ताकि लोग आसानी से साइबर फ्रॉड या IMEI की गड़बड़ियों की शिकायत कर सकें। यह सिर्फ जागरूकता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए है। सिंधिया ने कहा कि विपक्ष को अनावश्यक मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। यह ऐप सिर्फ एक ऐसा साधन है जिससे लोग अपने मोबाइल और पहचान को सुरक्षित रख सकें।
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