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‘हमारे पास 100 प्रतिशत सबूत, छोड़ेंगे नहीं’, वोटर लिस्ट में गड़बड़ी को लेकर राहुल गांधी का चुनाव आयोग को सख्त संदेश

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग (ECI) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के दौरान मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की जा रही है। राहुल गांधी ने संसद के बाहर पत्रकारों से बातचीत में कहा, “अगर चुनाव आयोग और उसके अधिकारी सोचते हैं कि वे बच निकलेंगे, तो वे गलत हैं। हम आपको छोड़ने वाले नहीं।”

क्या है मामला?

राहुल गांधी का आरोप है कि मतदाता सूची में जानबूझकर नाम जोड़े और हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के एक निर्वाचन क्षेत्र में 50, 60 और 65 साल की उम्र के हज़ारों नए मतदाता जोड़े गए, जबकि 18 साल से ऊपर के असली मतदाताओं के नाम हटाए गए। उन्होंने दावा किया कि उनके पास “100 प्रतिशत सबूत” हैं, लेकिन फिलहाल कोई दस्तावेज़ सार्वजनिक नहीं किया है।

विपक्षी दलों का विरोध

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके समेत कई दलों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। हाथों में पोस्टर लिए सांसदों ने नारे लगाए, “SIR लोकतंत्र की हत्या है” और “न्याय, न्याय, न्याय” विपक्षी दलों ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की है।

चुनाव आयोग का जवाब

चुनाव आयोग ने राहुल गांधी और विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को साफ और निष्पक्ष बनाना है। आयोग का कहना है कि “क्या हमें मृत, प्रवासी, दो जगह पंजीकृत या फर्जी मतदाताओं को सूची में रहने देना चाहिए?” आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा कि वह नागरिकता और पहचान की पुष्टि करने का अधिकार रखता है। चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों और नागरिकों से अपील की कि वे “राजनीतिक विचारधाराओं से ऊपर उठकर इस मुद्दे पर सोचें।”

पृष्ठभूमि में क्या चल रहा है?

बिहार में SIR प्रक्रिया के खिलाफ विपक्ष लगातार चार दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहा है। विपक्ष को डर है कि इस प्रक्रिया के जरिए हाशिए के समुदायों को मताधिकार से वंचित किया जा सकता है। उनका दावा है कि यह राजनीतिक लाभ के लिए मतदाता सूची में हेराफेरी करने का तरीका है। यह मामला अब सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के भविष्य से जुड़ा सवाल बन गया है। आने वाले दिनों में विपक्ष इस मुद्दे को और तेज़ी से उठाने की तैयारी में है।

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