नेशनल डेस्क: केरल के पल्लकड़ की रहने वाली नर्स निमिषा प्रिया को 16 जुलाई को यमन में फांसी की सजा होनी है। भारत सरकार और धार्मिक नेता निमिषा को बचाने के लिए लगातार प्रयासों में जुटे हैं। निमिषा के परिवार ने 8.5 करोड़ रुपये ब्लड मनी का ऑफर पीड़ित अब्दो महदी के परिवार को दिया है। लेकिन मृतक की फैमिली और हूती विद्रोही इसे स्वीकार नहीं करना चाहते। बता दें कि सिर्फ ब्लड मनी के जरिए ही अब निमिषा की जान बच सकती है।
निमिषा को बिजनेस पार्टनर अब्दो की हत्या का दोषी पाया गया है। मामले में उसे फांसी की सजा हुई है। यमन में शरिया कानून लागू है। अगर महदी का परिवार ब्लड मनी के लिए राजी हो जाता है तो निमिषा जेल से आजाद हो जाएगी। निमिषा की फैमिली 1 मिलियन डॉलर (साढ़े 8 करोड़ रुपये) ब्लड मनी देने के लिए राजी है। हालांकि पैसों का प्रबंध होने के बाद भी अब्दो की फैमिली राजी नहीं है। आखिर फैमिली पैसे क्यों नहीं लेना चाह रही, क्या और पैसों की डिमांड की जा रही है? इसके बारे में जानते हैं।
The Centre informed the #SupremeCourt that its diplomatic efforts to save Indian nurse #NimishaPriya facing execution in #Yemen on July 16 had failedhttps://t.co/XtrvzBKapD
— The Telegraph (@ttindia) July 15, 2025
इसकी एक वजह हैं हूती विद्रोही। अटॉर्नी ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा है कि हूती इसे सम्मान के साथ जोड़ चुके हैं। वे लोग ब्लड मनी पर बात नहीं कर रहे, जिससे मामले का हल नहीं निकल रहा। परिवार से लगातार बातचीत की कोशिशें जारी हैं। हूतियों को मनाने के लिए सुन्नी समुदाय के ग्रांड मुफ्ती जुटे हैं, वे केरल में डेरा डाले हुए हैं। उनकी यमन के धर्मगुरु से भी बात हो चुकी है।
वहीं, हूती यमन में एक्टिव हैं। इसकी वजह से यमन की राजधानी में भारतीय दूतावास नहीं है। यह भी निमिषा को बचा न पाने की बड़ी वजह है। पिछले 6 साल से यमन में हूती विद्रोही एक्टिव हैं। सऊदी अरब की राजधानी रियाद में जो भारतीय दूतावास है, वहीं से भारत मामले में पूरी नजर रख रहा है। बता दें कि सऊदी अरब के रिश्ते भी हूती विद्रोहियों के साथ ठीक नहीं हैं। इसकी वजह सऊदी को हूती अमेरिका समर्थक मानते हैं। हूती पहले भी सऊदी अरब के खिलाफ अपनी आवाज उठा चुके हैं।
मेष: दिन शुभ रहेगा...