Last Updated: October 14, 2026

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ओरल हेल्थ डे पर खास: दातुन से दांतों की बेहतर सफाई, मौसम के अनुसार करें इस्तेमाल

March 20, 2026

ओरल हेल्थ डे पर खास: दातुन से दांतों की बेहतर सफाई, मौसम के अनुसार करें इस्तेमाल

तन-मन के साथ मुंह की सफाई भी मायने रखती है। दुनिया भर में आज के दिन वर्ल्ड ओरल हेल्थ डे मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य मौखिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और स्वस्थ मुंह को स्वास्थ्य से जोड़ना है। इस अवसर पर आयुर्वेद की प्राचीन परंपरा दातुन पर विचार करना महत्वपूर्ण है, जो आधुनिक ब्रश से कहीं ज्यादा प्रभावी मानी जाती है।

महर्षि वाग्भट के ग्रंथ ‘अष्टांग हृदयम’ में दातुन के महत्व को विस्तार से बताया गया है। एक श्लोक में कहा गया है कि दांतों की सफाई से दुर्गंध दूर होती है, जीभ और दांतों की गंदगी निकलती है तथा स्वाद में ताजगी आती है। दातुन सिर्फ दांत साफ करने का माध्यम नहीं, बल्कि पूरे शरीर के लिए लाभकारी है। प्राकृतिक टहनियों से बनी दातुन दांतों को चमकदार बनाती है, मसूड़ों की देखभाल करती है और कई रोगों से बचाव में भी मददगार है।

महर्षि वाग्भट ने दातुन के लिए कड़वा या कसैले स्वाद वाली टहनियां बेहतर बताई हैं। नीम सबसे कड़वा होने के कारण प्रमुख है, लेकिन मदार को इससे भी बेहतर माना गया है। ग्रंथ में कुल 12 पेड़ों की टहनियां सुझाई गई हैं। इनमें नीम, मदार, बबूल, अर्जुन, आम, अमरूद, जामुन, महुआ, करंज, बरगद, अपामार्ग और बेर हैं। इनके अलावा शीशम और बांस का भी जिक्र है।

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आयुर्वेदाचार्य मौसम के अनुसार दातुन चुनने की सलाह देते हैं। चैत्र मास से गर्मियों तक नीम, मदार या बबूल की टहनी का इस्तेमाल उचित है। सर्दियों में अमरूद या जामुन, जबकि बरसात में आम या अर्जुन की टहनी से दातुन करना फायदेमंद बताया गया है।

नीम के दातुन में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो प्लाक और बैक्टीरिया हटाते हैं, मसूड़ों की सूजन-खून आने की समस्या दूर करते हैं और मुंह की बदबू खत्म करते हैं। नीम में निम्बीन, मार्गोसीन जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो पायरिया, दांतों में कीड़ा लगने की समस्या में राहत देते हैं। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के लिए नीम की ताजी टहनी से सुबह-शाम दातुन करने की सलाह है, जिससे शिशु पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। बबूल की दातुन कफ और पित्त नाशक है, रक्त संबंधी समस्याओं में भी लाभदायक है। इसमें मौजूद गोंद अतिसार, फेफड़ों की बीमारियां, दांतों का समय से पहले न गिरना, मसूड़ों से खून और मुंह के छाले रोकता है। नियमित उपयोग से मुंह सेहतमंद रहता है।

अर्जुन की टहनी में क्रिस्टलाइन लेक्टोन होता है, जो हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और टीबी जैसी बीमारियों में राहत देता है। महुआ (मधूक) वात-पित्त शांत करता है, त्वचा-मूत्र मार्ग की समस्याओं से बचाता है और दांतों की कमजोरी, रक्तस्राव, मुंह सूखना दूर करता है। बरगद की दातुन टैनिक तत्व से आंखों की रोशनी बढ़ाने में मददगार और गर्भावस्था की परेशानियां दूर करती है। अपामार्ग क्षारीय गुण से पथरी, श्वास और त्वचा रोग नष्ट करता है। करंज बवासीर, पाचन समस्या और पेट के कीड़ों में आराम देता है। बेर मुंह की समस्याओं के साथ गले की खराश, पीरियड्स में स्राव की अधिकता, खांसी और रक्त विकार दूर करता है।

आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि दातुन 6-8 इंच लंबी होनी चाहिए। इसे महीन कूची बनाकर इस्तेमाल करें। सुबह-शाम दातुन करना सबसे अच्छा है। दातुन करते समय उकड़ू (पांव के बल) बैठें, ताकि लाभ पूरे शरीर तक पहुंचे। नीम जैसे कुछ दातुन लगातार तीन महीने से ज्यादा न करें, बीच में विराम देकर मंजन या दूसरी टहनी अपनाएं।

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