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ग्रीन हाइड्रोजन: कम-कार्बन और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की नई राह

ग्रीन हाइड्रोजन: कम-कार्बन और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की नई राह

ग्रीन हाइड्रोजन: कम-कार्बन और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की नई राह

नई दिल्ली :  केंद्र सरकार ने बुधवार को बताया कि ग्रीन हाइड्रोजन कम-कार्बन और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की दिशा में बदलाव को तेज कर रहा है। यह भारत की स्वच्छ ऊर्जा रणनीति का मुख्य हिस्सा बन चुका है।

नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (एनजीएचएम) दुनिया के सबसे प्रतिस्पर्धी रिन्यूएबल एनर्जी बेस पर आधारित है। यह मिशन घरेलू उत्पादन को बढ़ा रहा है, नवाचार को बढ़ावा दे रहा है और ग्रीन हाइड्रोजन तथा इसके डेरिवेटिव्स के लिए ग्लोबल मार्केट को खोल रहा है।

केंद्र के अनुसार, एनजीएचएम का लक्ष्य भारत को क्लीन हाइड्रोजन में वैश्विक नेता बनाना और आवश्यक क्षमता तथा इकोसिस्टम तैयार करना है। 2030 तक मिशन के तहत लगभग 125 गीगावाट नई रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता स्थापित की जाएगी और 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा।

मिशन के प्रभाव से हर साल लगभग 50 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आने की उम्मीद है। साथ ही यह 6 लाख से अधिक रोजगार सृजित करेगा और जीवाश्म ईंधन के आयात में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत संभव बनाएगा।

सरकार ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग, घरेलू निर्माण और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। सार्वजनिक और निजी साझेदारी मजबूत करने और नियामक अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।

इसके अलावा, भारत ने वैश्विक हाइड्रोजन समुदाय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। 2024 में रॉटरडैम में वर्ल्ड हाइड्रोजन समिट में इंडिया पवेलियन का उद्घाटन किया गया, जिससे भारत की ग्लोबल निवेश साझेदारियों में स्थिति और मजबूत हुई।

एनजीएचएम भारत को स्वच्छ ऊर्जा और कम-कार्बन भविष्य की दिशा में अग्रणी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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