अव्यवस्थित जीवनशैली आजकल लोगों को शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार कर रही है। ऐसे में योगासन को रोजमर्रा की दिनचर्या में शामिल करना शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। विशेषज्ञ हृदय मुद्रा के नियमित अभ्यास की सलाह देते हैं, जिसे अपान वायु मुद्रा या मृत्संजीवनी मुद्रा के नाम से भी जाना जाता है।
मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, यह आसान हस्त मुद्रा प्राण ऊर्जा को हाथों के माध्यम से हृदय क्षेत्र तक पहुँचाती है। इसके नियमित अभ्यास से हृदय की ताकत बढ़ती है और हृदय से जुड़ी नाड़ियां सक्रिय होती हैं।
हृदय मुद्रा भावनात्मक संतुलन बनाने में भी मदद करती है। यह दबी हुई भावनाओं को मुक्त करती है और तनाव या मानसिक संघर्ष की स्थिति में व्यक्ति को शांत रखने में सहायक होती है। अनाहत चक्र (हृदय चक्र) को जागृत करने से व्यक्ति में प्रेम, शांति और संतुलन की भावना बढ़ती है।
इसके अलावा, यह मुद्रा ब्लड सर्कुलेशन को सुधारती है, नर्वस सिस्टम को शांत करती है और हृदय संबंधी समस्याओं को कम करने में मदद कर सकती है। इसे घर पर आसानी से किया जा सकता है।
योग एक्सपर्ट बताते हैं कि अभ्यास के लिए सुखासन या पद्मासन में बैठें, रीढ़ सीधी रखें और हाथों को घुटनों पर रखें। हथेलियों को ऊपर की ओर रखें, तर्जनी उंगली को अंगूठे के आधार से लगाएं, मध्यमा और अनामिका उंगलियों को अंगूठे के सिरों से स्पर्श कराएं और छोटी उंगली को ढीला रखें। आंखें बंद करके गहरी सांस लें और ध्यान हृदय क्षेत्र पर केंद्रित करें। विशेषज्ञ रोजाना 10 से 30 मिनट तक अभ्यास करने की सलाह देते हैं।
यह आसान मुद्रा सभी उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद है। हालांकि, गंभीर हृदय रोग होने पर योग विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है।
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