Site icon Dainik Savera Times

मटके का पानी अपने आप ठंडा कैसे रहता है? समझिए

matka water cooling

matka water cooling

गर्मी शुरू होते ही घर में सबसे पहले जिस चीज़ की याद आती है वो है ठंडा पानी। आज भले ही फ्रिज हर घर में हो लेकिन फिर भी मटके का पानी पीने का मज़ा कुछ अलग ही होता है। कई लोग कहते हैं कि मटके का पानी ज्यादा सुकून देता है… और ये बात सच भी है।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बिना बिजली के बिना किसी मशीन के मटका पानी को ठंडा कैसे कर देता है?

मटका लेता है सांस
पहली नजर में मिट्टी का घड़ा बिल्कुल ठोस लगता है लेकिन असल में ऐसा नहीं होता। मटके में बहुत ही छोटे-छोटे छेद होते हैं जिन्हें हम देख नहीं पाते। यही छेद इसे खास बनाते हैं। जब आप मटके में पानी भरते हैं तो उसमें से थोड़ा-सा पानी धीरे-धीरे बाहर की सतह तक पहुंचता रहता है। यह इतना कम होता है कि हमें दिखता भी नहीं लेकिन काम बहुत बड़ा करता है।

ये भी पढ़ें : https://dainiksaveratimes.com/lifestyle/heart-attack-signs-detailed/

ठंडक का असली कारण
अब असली खेल यहां से शुरू होता है। बाहर आई यह हल्की नमी हवा के संपर्क में आकर सूखने लगती है। इसी प्रक्रिया को वाष्पीकरण कहते हैं। जब पानी सूखता है, तो वह अपने साथ गर्मी भी ले जाता है। यानी मटके की सतह से धीरे-धीरे गर्मी बाहर निकलने लगती है। और जैसे-जैसे यह होता है अंदर का पानी ठंडा महसूस होने लगता है।

इसे ऐसे समझिए
कभी आपने गीले हाथों को पंखे के नीचे रखा है? तुरंत ठंडक महसूस होती है। क्यों? क्योंकि पानी सूखते समय आपके हाथ की गर्मी ले जाता है। मटका भी बिल्कुल यही करता है – बस लगातार और धीरे-धीरे।

गर्मी में पानी ज्यादा ठंडा
आपने नोटिस किया होगा कि मटके का पानी सबसे ज्यादा ठंडा गर्मियों में ही लगता है। ऐसा इसलिए क्योंकि गर्मी में पानी जल्दी सूखता है यानी वाष्पीकरण तेज होता है। जितनी तेजी से यह प्रक्रिया होगी उतनी ज्यादा गर्मी बाहर जाएगी और पानी उतना ही ठंडा होगा।

हवा का भी बड़ा रोल
अगर मटके को ऐसी जगह रखा जाए जहां हल्की हवा आती रहे तो पानी और ज्यादा ठंडा रहता है। हवा उस नमी को जल्दी सुखाती है जिससे ठंडक बढ़ जाती है।
इसलिए पुराने समय में लोग मटके को खिड़की या आंगन में रखते थे।

मटके का पानी क्यों लगता है अलग

फ्रिज का पानी बहुत ठंडा होता है कई बार इतना कि गले में लग जाता है। लेकिन मटके का पानी हल्का ठंडा और नेचुरल होता है। यह शरीर को धीरे-धीरे ठंडक देता है इसलिए इसे पीने के बाद एक अलग सुकून महसूस होता है। मटका कोई मशीन नहीं है लेकिन इसका काम किसी विज्ञान से कम भी नहीं है। छोटे-छोटे छेद, हवा और पानी के सूखने की प्रक्रिया – ये तीनों मिलकर बिना बिजली के पानी को ठंडा रखते हैं। शायद यही वजह है कि इतने सालों बाद भी नई-नई तकनीक आने के बावजूद मटका आज भी हमारे घरों में अपनी जगह बनाए हुए है।

 

Exit mobile version