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शोध के नए नतीजों से ‘Type-2’ Diabetes के बेहतर इलाज में मिल सकती है मदद!

May 5, 2023

शोध के नए नतीजों से ‘Type-2’ Diabetes के बेहतर इलाज में मिल सकती है मदद!

नई दिल्ली: वैज्ञानिकों ने भारत और यूरोप में ‘टाइप-2’ मधुमेह के विभिन्न स्वरूपों में आनुवंशिक समानताएं और अंतर पाया है और उनका कहना है कि इसका उपयोग देश में इस रोग के उपचार को और बेहतर बनाने में किया जा सकता है। स्वीडन में शोधकर्ताओं ने पूर्व में यह प्रदर्शित किया था कि मधुमेह को 5 उप-समूहों में विभाजित किया जा सकता है और ‘टाइप-2’ मधुमेह से जुड़े 4 उपसमूहों के बीच आनुवंशिक अंतर हैं। यह नया अध्ययन ‘द लांसेट रिजनल हैल्थ-साउथईस्ट एशिया’ जर्नल में प्रकाशित हुआ है, जिसमें यह पुष्टि की गई है कि वर्गीकरण प्रणाली पश्चिमी भारत में एक समूह पर लागू होती है। स्वीडन की लुंड यूनिवर्सिटी में जिनोमिक्स, मधुमेह और अंत:स्राविकी विषयों की सहायक प्राध्यापक रश्मि प्रसाद ने कहा, ‘अध्ययन भारत और यूरोप में टाइप-2 मधुमेह के विभिन्न स्वरूपों के बीच आनुवंशिक समानताओं तथा अंतर को रेखांकित करता है।’ प्रसाद ने एक बयान में कहा, ‘हम इसे भारत में टाइप-2 मधुमेह के मामले बढ़ने को बेहतर तरीके से समझने की दिशा में एक उत्साहजनक नए कदम के रूप में देखते हैं।’ नतीजे 2,217 रोगियों के क्लिनिकल आंकड़ों और पश्चिम भारत में टाइप-2 मधुमेह के 821 लोगों पर किए गए अध्ययन पर आधारित है।

विटामिन बी12 की कमी
अध्ययन के मुताबिक, भारत में दूसरा सबसे बड़ा समूह मोटापे से जुड़े मधुमेह वाले रोगियों (एमओडी) का है। इस तरह के प्रतिभागियों वाले समूह में शामिल किए गए भारतीय प्रतिभागी विटामिन बी12 की कमी के लिए आनुवंशिक स्वरूपों से संबद्ध थे और यह स्वीडन के लोगों में नहीं देखा गया। प्रसाद ने कहा, ‘हमारे अध्ययन में, यह भारतीय और स्वीडिश समूहों के बीच आनुवंशिक अंतर का एक रोचक उदाहरण है। इन नतीजों से यह पता चलता है कि दोनों क्षेत्रों की आबादी में रोग के कारण अलग-अलग हैं। विटामिन बी12 की कमी भारतीय एमओडी समूह में रोग का एक कारक हो सकता है।’

कम आयु में अल्पपोषित रहना, टाइप-2 मधुमेह जल्द शुरू होने का एक बड़ा कारण!
रश्मि प्रसाद ने कहा, ‘हम पूर्व के अपने इन निष्कर्षों की पुष्टि कर सके, जिनमें एक खास तरह का टाइप-2 मधुमेह पाया गया था और जो अपेक्षाकृत कम ‘बॉडी मास इंडैक्स’ वाले लोगों में दिखा था और यह भारत में मधुमेह का सबसे सामान्य प्रकार है।’ शोधकर्ताओं ने कहा कि इस उपसमूह को इंसुलिन की अत्यधिक कमी वाले मधुमेह से ग्रसित रोगियों के रूप में जाना जाता है और यह टाइप-2 मधुमेह का एक स्वरूप है। प्रसाद ने कहा, ‘भारतीयों में कम आयु में अल्पपोषित रहना, टाइप-2 मधुमेह जल्द शुरू होने का एक बड़ा कारण हो सकता है और यही कारण हो सकता है कि हम स्वीडन और भारत के मरीजों के बीच यह अंतर देख रहे हैं। हमारे शोध में यह भी पाया गया कि भारतीयों में अल्पपोषण की रोकथाम भी टाइप-2 मधुमेह के प्रसार को रोक सकती है।’

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