नई दिल्ली : वैश्विक स्तर पर मोटापे की दर में वृद्धि के बीच, एक अध्ययन से पता चला है कि अधिक वजन होने से चिंता जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली भी प्रभावित हो सकती है। पशुओं पर किए गए अध्ययन से पता चला कि ये दोनों स्थितियां आंत और मस्तिष्क के बीच अंत:क्रिया के माध्यम से जुड़ी हो सकती हैं। चूहों पर किए गए इस शोध में आहार-प्रेरित मोटापे को चिंता जैसे लक्षणों, मस्तिष्क संकेतन में परिवर्तन, तथा आंत के सूक्ष्म जीवों में अंतर से जोड़ा गया है। जो मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं।
अमरीका की जॉजिर्या स्टेट यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफैसर और पोषण विभाग की अध्यक्ष डेजीरी वांडर्स ने कहा, ‘हमारे निष्कर्षों से पता चलता है कि मोटापा चिंता जैसे व्यवहार को जन्म दे सकता है, जो संभवत: मस्तिष्क की कार्यप्रणाली और आंत के स्वास्थ्य में परिवर्तन के कारण हो सकता है।‘ मोटापे के अन्य खतरों जैसे टाइप-2 मधुमेह और हृदय रोग के अलावा, अध्ययन में मस्तिष्क स्वास्थ्य पर इसके संभावित प्रभावों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें एक माउस मॉडल का उपयोग किया गया। जो मनुष्यों में देखी जाने वाली मोटापे से संबंधित कई समस्याओं को विकसित करता है।

