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तनाव और गुस्सा बढ़ रहा है? पित्त दोष हो सकता है वजह

Pitta dosha may be the reason

Pitta dosha may be the reason

बार-बार गुस्सा आना, चिड़चिड़ापन महसूस होना और तनाव महसूस होना, ये सिर्फ खराब परिस्थितियों पर ही निर्भर नहीं करता है। यह लक्षण पित्त दोष के असंतुलन के हो सकते हैं, जो हमारे भावनात्मक संवेगों को नियंत्रित करता है।

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आयुर्वेद में पित्त का असंतुलन शरीर को अंदर से कमजोर और मानसिक अस्थिरता लाता है जिससे तन और मन दोनों ही बेचैनी महसूस करते हैं। आयुर्वेद में पित्त दोष को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि उसका प्रभाव सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी देखने को मिलता है।

इसके असंतुलन से क्रोध, चिड़चिड़ापन, बेचैनी, पेट की जलन और मानसिक अशांति महसूस होती है। बिना बात के रोने का मन करता है और शाम के समय बेचैनी बढ़ जाती है। आयुर्वेद हमें सिखाता है कि पित्त को दबाया नहीं जाता, उसे शीतल, संतुलित और सही दिनचर्या से शांत किया जाता है।

आयुर्वेद में पित्त शांत और संतुलित करने के कई तरीके बताए गए हैं, जिसमें पहला है पित्त शामक पेय पदार्थ। इसमें जीरा, सौंफ, सोंठ और अंगूर के रस को मिलाकर पेय पदार्थ बनाया जाता है। ये पेय पदार्थ पेट की जलन को शांत करने में मदद करता है, जिससे हार्टबर्न की परेशानी कम होती है।

दूसरा है पित्त शामक औषधि। इसमें अविपत्तिकर चूर्ण शामिल है, जो मन और तन को शांत रखने में मदद करता है और तनाव और बेचैनी को भी नियंत्रित करता है। इसे गुनगुने पानी के साथ किसी भी समय लिया जा सकता है, हालांकि सेवन से पहले एक बार चिकित्सक से सलाह जरूर लें।

तीसरा है घी नस्य। इसमें रात के समय नाक में देसी शुद्ध घी की कुछ बूंदे डालें। ये प्रक्रिया मस्तिष्क को शांत करने में मदद करती है। अगर नाक में घी डालने में किसी तरह की परेशानी होती है, तो उंगलियों के जरिए घी को नाक के अंदर लगा सकते हैं। इसके अलावा, अभ्यंग करना भी मन और तन के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।

अभ्यंग करने से तन की अग्नि शांत होती है और जलन और खुजली का कारण बनती है। इसके लिए नारियल और भृंगराज का तेल सिर पर तलवों पर लगाने से आराम मिलेगा। पित्त को शांत करने के लिए आहार में हर्बल चाय को भी शामिल कर सकते हैं। इसे बनाने के लिए कैमोमाइल, तुलसी और गुलाब को एक साथ पानी में उबालकर लें। इससे मन को असीम शांति मिलेगी।

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